संदेश

एक जैसे हैं हालात एक जैसे हैं जज्बात ना फिकर करना मेरे हमसफर ना ड़रने की करना बात  राहें  हो जायेगी आसान जब हम चलेंगे  साथ साथ || एक जैसे हैं हालात एक जैसे हैं जज्बात ख़ुशी का दिन हो य़ा गम की हो रात चलेंगे थामे एक दुजे का हाथ ना फिकर करना मेरे हमदम ना डरने की करना बात एक  जैसे हैं हालात एक  जैसे  हैं जज्बात || #AP
७२२ गाँव वाले घर में , मेरे बचपन की यादे रहती है बोलता है घर का कोना कोना दीवारे भी बहुत कुछ कहती है || गाँव वाले घर में मेरे बचपन  की यादे रहती है सोचती हूँ ? एक बार  जाऊँ उस घर में समेट लाऊँ वो सब यादे जो बड़े शहरों में नहीं  मिलती है गांव वाले घर में मेरे बचपन की यादें रहती है || जी भरके चूम लूँ उन दीवारों को जो वर्षों माँ के स्पर्श से महकी है गांव वाले घर में मेरे बचपन की यादें रहती है || गगनचुम्बी इमारतों की दीवारे हर पल लगती है बेगानी मिट्टी की सौंधी खुशबू उनसे नहीं आती है गांव वाले घर में मेरे बचपन की यादें रहती || #AP
"बाल दिवस " घर को किलकारी से गुंजाते नन्हे मुन्नो को बस्ते के बोझ तले दबे बचपन को शरारत करते लड़कपन को सड़को पर कूडा बीनते बच्चों को दो जून की रोटी को तरसती मासूमियत को बाल उमर में जिम्मेदारी का बोझ ढ़ोती शख्सियत को ढ़ाबे पर बरतन धोते छोटू को चाय बेचते गोलू को बाल दिवस की शुभकामनायें |
FB-251 कभी कभी आँसू जाते हैं हार कभी हार जाता हैं प्यार | हार जाती हैं यादे हार जाती हैं फरियादे | हार के इस सिलसिले में एक दिन ज़िंदगी भी जाती है हार || इसमें ही  हैं जीवन का सार और क्या लिखूँ  मेरे यार ||| ~~~~~~अनितापाल ~~~~~~~ #Anita Pal Sukhatri
FB-251 कभी कभी आँसू जाते हैं हार कभी हार जाता हैं प्यार | हार जाती हैं यादे हार जाती हैं फरियादे | हार के इस सिलसिले में एक दिन ज़िंदगी भी जाती है हार || इसमें ही  हैं जीवन का सार और क्या लिखूँ  मेरे यार ||| ~~~~~~अनितापाल ~~~~~~~ #Anita Pal Sukhatri
FB-251 कभी कभी आँसू जाते हैं हार कभी हार जाता हैं प्यार | हार जाती हैं यादे हार जाती हैं फरियादे | हार के इस सिलसिले में एक दिन ज़िंदगी भी जाती है हार || इसमें ही  हैं जीवन का सार और क्या लिखूँ  मेरे यार ||| ~~~~~~अनितापाल ~~~~~~~ #Anita Pal Sukhatri
ज़मीं -आसमां ,चाँद तारे ये सब हैं दोस्त  मेरे || घास का बनाके  तकिया , निहारा  जो मैने आसमां इश्क मुझे बादलो से हुआ || इतराती हुई आयी जब घटा सुरज दुबकने को मजबूर हुआ || प्रकृति के मनोरम सौंदर्य  को आँखो से मैने चख लिया | इठलाती हुई गुजरी जब हवा मेरे बगल से ... पता मैने उसका पूछ लिया | खिलते हुए फूलों ने देखा जो एक नजर  मुझे शरमा के सिर अपना झुका लिया | धान की सुनहरी बालियों ने मन मेरा मोह लिया || धरती का ये हरा भरा आँचल जब लहराता हैं सचमुच मन मेरा बहुत इतराता हैं | प्रकृति का किया ज़िसने अदभुत श्रृंगार उनको मेरा नमन बार बार || #anita_pal_sukhatri
"एक सलाह " मंजिल की राहों  में डगमगाये जब कदम | ख्वाहिशों का जब घुटने लगे दम | नजर आये हर तरफ धुंआ सा अरमान बन जाये कुहासा || सूझे ना जब कोई राह काम ना आये किसी की सलाह || बेसुरा लगे जब जीवन का राग साथ ना दे रहा हो दिमाग || धड़कनों का तुम सुनो संगीत सांसो के बन जाओ मीत || कभी हार ,कभी जीत यही तो है जिंदगी का गीत ||
"खुद में ही है खुदा " खुद ही राँझा हीर हूँ खुद ही हूँ सोनी महिवाल इश्क किया है खुद से हुआ है बुरा हाल || हर पल होती खुद की फिक्र हर बात में होता खुद का ज़िक्र खुद की ही अब होती पुकार खुद पर ही लुटता है प्यार खुद के इश्क में हो गये पागल खुद के ही हम हो गये कायल खुद में ही अब जीना मरना खुदी में है खुदा बन जाना खुद से ही जुदा ,खुद ही पर फिदा सबसे अलग है अपनी हर अदा ||
ाँचवां शतक " यूँ तो हर शतक "मेरी माँ " के लिये होता है पर ये शतक मेरी प्यारी सी "मौसी माँ " के लिये .... माँ के जैसी होती मौसी माँ के जैसा रखती ख्याल बनकर माँ करती फिकर माँ की तरह ही लुटाती प्यार माँ के जैसी भोली सी सूरत माँ के जैसी ममता की मूरत माँ के जैसी दूजी माँ याद बहोत आती है "मौसी माँ " #missyou