"बाल दिवस "
घर को किलकारी से गुंजाते नन्हे मुन्नो को
बस्ते के बोझ तले दबे बचपन को
शरारत करते लड़कपन को
सड़को पर कूडा बीनते बच्चों को
दो जून की रोटी को तरसती मासूमियत को
बाल उमर में जिम्मेदारी का बोझ ढ़ोती शख्सियत को
ढ़ाबे पर बरतन धोते छोटू को
चाय बेचते गोलू को
बाल दिवस की शुभकामनायें |
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