संदेश

759                (1)   मैं गर्भ में मचल रही थी   इस धरा पर आने को   दादी ने मन्नत मांगी थी   मेरी माँ की कोख सजाने को | आयी जब मैं इस धरा पर घर में पसरा सन्नाटा था   वजह  जानी तो पता चला  चाहिए सबको बेटा था   सन्न रह गयी मैं यह जानकर मैं नहीं हूँ नयी मेहमान उस दिन लगा मुझे.... जैसे निकल गये प्राण ||                (2) पापा की मैं परी बन गयी माँ की बन गयी दुलारी कर ना पायी बेटों की बराबरी बन के रह गयी बस बेचारी सन्न रह गयी मैं....... जब बताया गया मुझे पराया धन सच बताऊं उस दिन खिन्न हो गया मेरा मन ||                   (3) कसमें रस्में, यादें वादे सपनों की लेकर बारात दुल्हे राजा ने थाम लिया मेरा हाथ तुम ही मेरी जिंदगी, तुम हो मेरी जान बिन तुम्हारे मेरी नहीं कोई पहचान | निभाऊंगा वादे सारे हमेशा करूंगा सम्मान बिन तुम्हारे मैं त्याग दूँगा प्राण कुछ यूँ ही दिलाया मुझे विश्वास फिर एक दिन अचानक हो आ...
लिख दूँ प्यार य़ा लिख दूँ तकरार तुम कहो तो लिख दूँ दो दिलों का करार || धरती लिख दूँ या लिख दूँ आकाश तुम कहो तो लिख दूँ दो दिलों का विश्वास || नदियां लिख दूँ य़ा लिख दूँ किनारे तुम कहो तो लिख दूँ प्यार का समन्दर प्यारे || मन्दिर मस्जिद लिख दूँ य़ा लिख दूँ गुरुद्वारे तुम जो कहो लिखूँ वही प्राण प्यारे || #लवयूजिंदगी #AP
४४८ हर क्षण ,हर पल नैनों का नीर अविरल || वो बाते ,वो यादे , जेहन में घूमते अधूरे वादे | मधुर मिलन की टूटती आस , इस जनम की अधूरी प्यास | हर पल पास होने का अहसास सचमुच तुमसा नहीं कोई खास | ~~~~अनिता पाल ~~
                     (१) दुनियां की सुसंस्कारी लड़कियों !! संस्कार की चादर में इस कदर मत लिपट जाना कि वो तुम्हारा कफन बन ज़ाये |बिता ना देना ज़िंदगी लक्ष्मणरेखा की कैद में |मुझे फिकर है संस्कारों की भूल भूलैया में मासूम सी जिन्दगी उलझ ना जाये | हो ना जाना इतनी बेपरवाह की ख्वाहिशे दफन हो जाये | कहीं ऐसा ना हो संस्कारों की फिकर करते करते तुम्हारे अरमानों की चिता सज जाये | ना आने देना  वो दिन जब तुम्हारे अरमान आंसू बन गालों पर लुढक ज़ाये | पथरा ना जाये तुम्हारे नयन इस कदर कि कोई ख्वाब इनमें पल ना सके |                                (२)                            लड़कपन की उडान भरती बच्चियों !! बहककर उलझ ना किसी ऐसे जाल में जो तुम्हारे जीवन का जंजाल बन ज़ाये |फूंक फूंक कर रखना हर कदम स्वार्थ की इस दुनियां में |पड ना जाना किसी ऐसे  अमीर के प्यार में जो बेच दे अपना ज़मीर और फिर एक...
७५१ क्या बताये साहब ??? बुन रही हूँ आजकल  ख्वाब सपनों की चुनर में लगाये उम्मीदों के सितारे है || एक भोली सी सुरत पर दिल हम हारे है || #AP
ज़मीन से जुडी हूँ ,इंसानो की कद्र जानती हूँ अच्छे -बुरे को भलीभांति पहचानती हूँ | यूँ तो भोली सी सुरत है मेरी पर गलत को सबक सीखाना भी जानती हूँ | ज़िन्दगी में सहे है बहुत रंजोगम पर मुशकिलों को पार करना भी जानती हूँ | आँखो में झिलमिलाते ख्वाबों को हकीकत में बदलना जानती हूँ || अच्छी हूँ बस अच्छों के लिए बुरों को उनकी औकात दिखाना जानती हूँ | यूँ तो रहती है नजरों  में हया , पर वक्त आने पर आंखे दिखाना जानती हूँ || मुस्कराती हूँ हर गम को छुपाकर इस ज़िन्दगी की कीमत पहचानती हूँ || #AP
तुम बन ज़ाओ मीत मेरे मैं तुम्हारी प्रीत बन ज़ाऊँ | तुम बन जाओं नींद मेरी मैं तुम्हारे ख्वाब बन जाऊँ | तुम बन जाओं सांस मेरी मैं तुम्हारी खुशबू बन जाऊँ || मेरे दिल की धड़कन तुम्हारे जीवन का संगीत बन जायें || रिश्ता रूह से रूह तक का जनम जनम तक बन जाये | #AP
FB-113 हे प्रभु , मुझे ऐसा वर दो ..... आकाश की रिक्तता पृथ्वी की पूर्णता सागर सी गहराई पर्वत सी ऊँचाई नदी सी चंचलता पुष्प सी कोमलता चित्त में स्थिरता ह्रदय में सरलता भर दो ...... प्रभु मुझे ऐसा वर दो ....... ~~~~~अनिता पाल ~~~ #Anita Pal Sukhatri
७४४ प्रेम पत्र -७   "सिर्फ तुम "                 प्रियवर                              कई साल से "तुम " मेरा  रिसर्च का   विषय रहे हो |कई बार  मैने तुम्हे जंगली ,अनपढ़ ,आलसी ,मेरी जान ,मेरी ज़िंदगी जैसे शब्दों से नवाजा है | ना जाने कितनी बार तुमने मेरी कल्पनाओं में आकार लिया है |  हजार बार "तुम " बिन दस्तक दिये मेरे ख्यालों में प्रवेश कर गये |कितने सावन बिन फुहार के गुजर गये ?? कितने फागुन बिन बहार के बेरंग लौट गये तुम्हारे इंतजार में | सालों से मैने तुम्हें  कभी दिल की धड़कन ,कभी मन की कल्पना में कभी ,कभी ख्वाबों में तो कभी पलकों के बीच छूपा कर रखा | आज जब "तुम " ख्वाब  से हकीकत बन गये  तो मेरे आसपास के लोगो की रिसर्च का विषय बन गये हो "तुम "||| पिछले छ: साल में सात प्रेम पत्र ही लिख पायी उसके लिये क्षमा चाहती हूँ | ज़माने के डर को ताक पर रख मैं यूँ प्रेम पत्र लिखती रहूँगी ये मेरा वादा है |           ...
७४३ "बेबसी" हर रोज की तरह ऑफिस जाने के लिये ऑटो का इंतजार कर रही  थी थोडी देर बाद एक ऑटो रुका | एक लड़का और  एक लड़की पहले से ही ऑटो में बैठे हुए थे दोनों की हीऊम्र 18-20 वर्ष  होगी | ऑटो में बैठते ही मैने देखा लडकी रो रही है और लड़का उसको कुछ समझा रहा हैं | ऑटो में तेज आवाज में चल रहे म्यूजिक के कारण मुझे बस एक इतना ही सुनायी दिया .... कभी मेरे बारे में भी सोचा है  तुमने ??..लडकी ने रोते हुए कहा ... मैने तो कभी सोचा ही नहीं तुम्हारे बारे में ...लड़के ने माथे सलवटे ड़ालते हुए कहा ... लडकी  थोडी देर तेज तेज रोकर चुप हो गयी और फिर अपना सिर पकड कर बाहर की ओर देखने लगी लड़का बार बार बेचैन हो उसका चेहरा देखने की असफल कोशिश करता  और फिर मेरी ओर देखकर ये आश्वस्त होने की कोशिश करता कि मैं उनके मामले से अनभिज्ञहूँ ....अफसोस वो दोनों तरफ ही असफल प्रयास कर रहा था | क्यूँकि सबकुछ  भले ही ना पता हो पर कुछ तो आभास हो ही गया था मुझे |                                     ...