हालातों पर हंस लेती हूँ अपनेपन पर रो लेती हूँ | बिखेर कर मुस्कान प्यारी सी बीज प्यार के बो देती हूँ | मालूम नहीं कल क्या हो बस आज पर ही इतरा लेती हूँ | #AP#NP
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जुगनू
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बचपन में मै ज़िसकी दिवानी थी | ज़िसको देख मै खुशी से चहक उठती थी |ज़िसकी चंचलता मुझे बहुत ही आकर्षित करती थी | ज़िससे मिलने के लिये मैं रात का इंतजार किया करती थी | रात्रि के घुप्प अंधेरे उसको देखना मेरे लिये किसी उपहार से कम नहीं होता था | उसका यूँ चमकते दमकते ,टिमटिमाते हुए आते देख मैं खुशी से चिल्ला उठती जूगनू जूगनू | पकडने के लिये दौड़ती और पकड भी लेती | उसको पकड दोनो हाथो का घेरा बना उसमे ऐसे झांकती तो ऐसा लगता मानो बन्द कमरे में लालटेन जल रही हो और अंगुलियो रूपी खिडकी से वो बाहर आने की कोशिश करता और मैं उसे फिर से मुठ्ठी में हलके से बन्द करने की कोशिश करती और फिर उसको रोशनी में ले जाकर देखती कि वो सिर्फ अंधरे में ही चमकता हैं या रोशनी में भी | सोचती भगवान ने भी कमाल भी बहुत कमाल किया इसे सबसे अलग बनाकर इसको तो पंखो के साथ रोशनी भी दी हैं | माँ से पूछा तो माँ ने कहा इसने कुछ ऐसा किया होगा कि भगवान खुश हो गये होंगे और इसे उपहार में दे दी होंगी •| न...
नन्ही सी जान
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ऐ नन्ही सी जान तू बन गई है मेरी पहचान रातों को सोचूं दिन को विचारूँ किस नाम से मैं तुझको पुकारूं ऐ नन्ही सी जान , तू बन गई है मेरी पहचान|| तू ही मेरे अरमां, तू ही मेरा खिलौना तू बन गया है मेरा सपना सलोना ऐ नन्ही सी जान तू बन गई है मेरी पहचान|| तू है मेरी चाहत, तू जन्नत है मेरी तुझसे ही तो ये जिंदगी उन्नत मेरी ऐ नन्ही सी जान तू बन गई है मेरी पहचान|| #अनिता पाल
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस
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अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष .. यह भी कैसी विडम्बना है , लड़की के साथ पैदा होने से पहले ही भेदभाव शुरू हो जाता है | पहले तो उसको गर्भ में ही मारने की कोशिश की जाती है , यदि वह जन्म ले भी लेती है ,तो फिर वही सिलसिला शुरू हो जाता है | बेटो को तो सब सुविधाये दी जाती है , और बेटियों को उनसे वंचित रखा जाता है | उसको तो हमेशा पराया धन समझा जाता है इसीलिये उससे इतना भेदभाव होता है | इसके बावजूद भी वह सब कुछ सहती है मन से माँ बाप की सेवा करती है | क्यों भूल जाते है लोग कि वह दो घरों को रोशन करती है अपने लिये नहीं वह हमेशा अपनों के लिये जीती है | ज़िन्दगीं भर ज़हर के घूट पीती है || यही पर उसकी पीडा समाप्त नहीं होती शादी के बाद क्या वो मुसीबते नहीं सहती ? फिर वह दहेज के लिये प्रताडित की जाती है यदि वह इन सब से बच जाती है तो बुढ़ापे में सारी कसर निकल जाती है | बुढ़ापे में में वह बेसहारा हो जाती है बेटे - बहु पर वह बोझ बन जाती है | ज़िनको उसने पाला उनके लिये वह परायी हो जाती है क्या यही नारी है जो जीवन भर सतायी जाती है ?? #अनिता पाल #
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस
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FB-72 अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष .... आधुनिक नारी , सब पर भारी | उत्साह की है ये अदभुत चिंगारी | कोमल है कमजोर नहीं , इतनी भी कच्ची डोर नहीं | घरेलू होने के साथ साथ है कामकाजी रिशते नातो को निभाकर रखती है सबको राजी | जीतने की ज़िद है इरादे है बुलंद , चाहती है आसमां में उडना स्वछन्द | कभी होती थी अबला और बेचारी , लेकिन सशक्त है आधुनिक नारी | ~~~~~अनिता पाल ~~~~~~ #Anita Pal Sukhatri
जिंदगी
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७४२ रात की ये तन्हाई याद तेरी संग लाई आँखों में तुम्हारे ख्वाब है दिल में तुम्हारे ख्याल है तुम्हारे ख्यालों से मेरी रातें हुई रंगीन है तुम्हारी यादों से दिन हुए हसीन है दिल की धड़कन है तुम्हारा बसेरा हर सांस पर है तुम्हारा पहरा तुम्हारी यादों में सिमट गया है मेरा जहान तुम्हारी मुस्कान बन गयी है मेरी पहचान होती क्या है चाहत??? तुमसे मिलकर हमने है जाना कुछ है दूरी ,कुछ है मजबूरी सच कहूँ तो तुम बिन मेरी ज़िंदगी है अधूरी || #लवयूज़िंदगी #अनिता पाल