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नन्ही सी जान

 ऐ नन्ही सी जान तू बन गई है मेरी पहचान रातों को सोचूं दिन को विचारूँ किस नाम से मैं तुझको पुकारूं ऐ नन्ही सी जान , तू बन गई है मेरी पहचान|| तू ही मेरे अरमां, तू ही मेरा खिलौना तू बन गया है मेरा सपना सलोना ऐ नन्ही सी जान तू बन गई है मेरी पहचान|| तू है मेरी चाहत, तू जन्नत है मेरी तुझसे ही तो ये जिंदगी उन्नत मेरी  ऐ नन्ही सी जान तू बन गई है मेरी पहचान|| #अनिता पाल

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस

 अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष .. यह भी कैसी विडम्बना है , लड़की के साथ पैदा होने से पहले ही भेदभाव शुरू हो जाता है | पहले तो उसको गर्भ में ही मारने की कोशिश की जाती है , यदि वह जन्म ले भी लेती है ,तो फिर वही सिलसिला शुरू हो जाता है | बेटो को तो सब सुविधाये दी जाती है , और बेटियों को उनसे वंचित रखा जाता है | उसको तो हमेशा पराया धन समझा जाता है  इसीलिये उससे इतना भेदभाव होता है | इसके बावजूद भी वह सब कुछ सहती है  मन से माँ बाप की सेवा करती है | क्यों भूल जाते है लोग कि वह दो घरों को रोशन करती है  अपने लिये नहीं वह हमेशा अपनों के लिये जीती है | ज़िन्दगीं भर ज़हर के घूट पीती है || यही पर उसकी पीडा समाप्त नहीं होती  शादी के बाद क्या वो मुसीबते नहीं सहती ? फिर वह दहेज के लिये प्रताडित की जाती है  यदि वह इन सब से बच जाती है  तो बुढ़ापे में सारी कसर निकल जाती है | बुढ़ापे में में वह बेसहारा हो जाती है  बेटे - बहु पर वह बोझ बन जाती है | ज़िनको उसने पाला उनके लिये वह परायी हो जाती है  क्या यही नारी है जो जीवन भर सतायी  जाती है ?? #अनिता पाल #

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस

 FB-72 अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष ....  आधुनिक नारी , सब पर भारी | उत्साह की है ये अदभुत चिंगारी | कोमल है कमजोर नहीं , इतनी भी कच्ची डोर नहीं | घरेलू होने के साथ साथ है कामकाजी  रिशते नातो को निभाकर रखती है सबको राजी | जीतने की ज़िद है इरादे है बुलंद , चाहती है आसमां में उडना स्वछन्द | कभी होती थी अबला और बेचारी , लेकिन सशक्त है आधुनिक नारी | ~~~~~अनिता पाल ~~~~~~ #Anita Pal Sukhatri

जिंदगी

 ७४२ रात की ये तन्हाई  याद तेरी संग लाई  आँखों में तुम्हारे ख्वाब है  दिल में तुम्हारे ख्याल है  तुम्हारे ख्यालों से मेरी रातें हुई रंगीन है  तुम्हारी यादों से दिन हुए हसीन है  दिल की धड़कन है तुम्हारा बसेरा  हर सांस पर है तुम्हारा पहरा  तुम्हारी यादों में सिमट गया है मेरा जहान  तुम्हारी मुस्कान बन गयी है मेरी पहचान  होती क्या है चाहत??? तुमसे मिलकर हमने है जाना  कुछ है दूरी ,कुछ है मजबूरी  सच कहूँ तो तुम बिन  मेरी ज़िंदगी है अधूरी || #लवयूज़िंदगी  #अनिता पाल

जिंदगी

 २८९ ख्वाबों ,ख्यालों और सवालों का है  काफिला संग में , लोग कहते है ..... तन्हा हूँ मैं ज़िंदगी के सफर में | आगे आगे चलते है ख्वाब , संग मेरे चलते है ख्याल  पीछे पीछे बहुत सारे सवाल || संभालती हूँ मैं इन्हे  या ये मुझे रहे है संभाल | अनुत्तरित है आज तक ये भी सवाल || ~~अनिता पाल
FB-123 अभी अभी  किसी ने इनबोक्स में पूछा ..... आपके यहां गर्मी कैसी है ???? हमारे यहां गर्मी बहुत अच्छी है जनाब .....जेठ की तपती धूप की चिलचिलाती गर्मी से लेकर सावन भादो की चिपचिपी गर्मी तक का अनुभव है हमे तो | हम तो आदी हो गये इस तरह की गर्मी के  आदी क्या ये कहो कि ऊब गये इस गर्मी से |                        और इस ऊब के साथ ही हम आजकल एक नयी गर्मी का आनन्द ले रहे है ....नयी गर्मी मतलब वही गर्मी ..ज़िसके बारे में लोग कहते है ...... ना गर्मी जून में होती है ,ना खून में होती है गर्मी तो जूनून में होती है | आजकल जूनून की गर्मी इस कदर हावी है कि मौसम की गर्मी का पता ही नहीं चलता |इसका मतलब ये नहीं कि हमे वातावरण की गर्मी  का अहसास ही नहीं| दिन में कम से कम एक बार तो हम धूप में जाकर पसीने से नहा ही लेते है वो इसीलिये कि कही बडे शहरो की चकाचौंध और ए .सी की ठंडक में में हम अपनी ग्रामीण पृष्ठभूमि को ना भूल ज़ाये|                   निसंदेह गर्मी बहुत है आप अपना ख्याल रख...
"चलते चलते /आँखो देखी " अच्छे खासे तो चल रहे थे दोनो मुझसे आगे |सुषुप्त ज्वालामुखी कब जाग्रत हो विस्फोटित हो गया पता ही नहीं चला | ख्यालो में खोयी सी  मैं यूँ ही  धीरे धीरे  चल रही थी |मुझसे चन्द कदम आगे चल रहे एक विवाहित जोडे में झगडा होने से मेरी तन्द्रा टूटी | बातें कुछ यूँ हुई ....... भसरी पै मार दूँगा .(महिला की तरफ मारने की मुद्रा में हाथ उठाते हुए ).. मार कै देख ..(सीना तान पुरूष की तरफ लपकते हुए ) धक्का दे दूँगी .....!!!!!!! दे कै देख .......!!!!!(और दे भी दिया  ..बेचारा गाडी के नीचे आते आते बचा ) इतना सुनते पुरूष को बीच रोड पर  धकेल दिया गया ..... वही ले जाकर मारूँगा .....(चन्द कदमो की दुरी पर बने पुलिस स्टेशन की तरफ इशारा करते हुए ) यहां मैने एक बात नोटिस की महिला की कथनी और करनी में बिलकुल अन्तर नहीं था ... . उपरोक्त वार्ता में हुई तमाम गालियों को मैने लिखने की हिम्मत नहीं की  और उसके  बाद भरी सड़क पर हुई गालियों और मारपीट  को लिखने का साहस मुझमे नहीं है | इतनी गंदी गालियों को सुनकर मैं शरम से पानी पानी हो रही थी  | हाँ च...
२५४ अभी अभी इनबोक्स में एक सज्जन ने पूछ लिया ..... हाईस्कूल से लेकर परास्नातक तक में कितनी बार आपको प्रथम श्रेणी प्राप्त हुई ??? "सफलता का अन्दाजा इस बात से ना लगाये कि आप कहाँ पहुँचे ब्लकि इस बात से लगाये कि आपने चलना कहाँ से शुरू किया था |" आपके  प्रमाण पत्रों  में  प्रथम श्रेणी मिलने से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है आपका व्यवहार अव्वल दर्जे का हो |आप अपने संघर्ष को एंजॉय करते हो |सुख दुख में सम रहते है |मैने दौलत और शोहरत वालो को सुसाइड करते देखा है | सच बताऊँ तो मैने मार्कशीट में मिले अंको की कभी परवाह नहीं की क्योंकि मेरा आत्मविश्वास ,मेरा संघर्ष ,मेरी सहजता और मेरी आत्मीयता  अपनों के दिलो पर राज करने और ज़िंदगी की परीक्षा प्रथम आने के लिए काफी है |(#मियां_मिठ्ठू 😂) #अनितापाल
५०३ दिल से है ये अभिलाषा जुग जुग जिये मेरी मातृभाषा || #A.P
FB-251 कभी कभी आँसू जाते हैं हार कभी हार जाता हैं प्यार | हार जाती हैं यादे हार जाती हैं फरियादे | हार के इस सिलसिले में एक दिन ज़िंदगी भी जाती है हार || इसमें ही  हैं जीवन का सार और क्या लिखूँ  मेरे यार ||| ~~~~~~अनितापाल ~~~~~~~ #Anita Pal Sukhatri