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अभी अभी  किसी ने इनबोक्स में पूछा .....
आपके यहां गर्मी कैसी है ????
हमारे यहां गर्मी बहुत अच्छी है जनाब .....जेठ की तपती धूप की चिलचिलाती गर्मी से लेकर सावन भादो की चिपचिपी गर्मी तक का अनुभव है हमे तो | हम तो आदी हो गये इस तरह की गर्मी के  आदी क्या ये कहो कि ऊब गये इस गर्मी से |
                       और इस ऊब के साथ ही हम आजकल एक नयी गर्मी का आनन्द ले रहे है ....नयी गर्मी मतलब वही गर्मी ..ज़िसके बारे में लोग कहते है ......
ना गर्मी जून में होती है ,ना खून में होती है
गर्मी तो जूनून में होती है |
आजकल जूनून की गर्मी इस कदर हावी है कि मौसम की गर्मी का पता ही नहीं चलता |इसका मतलब ये नहीं कि हमे वातावरण की गर्मी  का अहसास ही नहीं| दिन में कम से कम एक बार तो हम धूप में जाकर पसीने से नहा ही लेते है वो इसीलिये कि कही बडे शहरो की चकाचौंध और ए .सी की ठंडक में में हम अपनी ग्रामीण पृष्ठभूमि को ना भूल ज़ाये|
                  निसंदेह गर्मी बहुत है आप अपना ख्याल रखियेगा | इस झूठी उम्मीद के साथ गर्मी की तपिश को सहन कर लिजिये कि जल्दी ही सावन की रिमझिम फुहारे बरसेंगी | झूठी इसीलिये क्योंकि सावन की ठंडी फुहारे अब ग्लोबल वार्मिंग की भेंट चढ़ चुकी हैं |अब सावन  बरसता तो हैं या तो कवि की कविता में में या आम आदमी के ख्यालो  में |
#Anita Pal Sukhatri

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