पत्र

 (१)

दुनियां की सुसंस्कारी लड़कियों !! 

संस्कार की चादर में इस कदर मत लिपट जाना कि वो तुम्हारा कफन बन ज़ाये |बिता ना देना ज़िंदगी लक्ष्मणरेखा की कैद में |मुझे फिकर है संस्कारों की भूल भूलैया में मासूम सी जिन्दगी उलझ ना जाये | हो ना जाना इतनी बेपरवाह की ख्वाहिशे दफन हो जाये | कहीं ऐसा ना हो संस्कारों की फिकर करते करते तुम्हारे अरमानों की चिता सज जाये | ना आने देना वो दिन जब तुम्हारे अरमान आंसू बन गालों पर लुढक ज़ाये | पथरा ना जाये तुम्हारे नयन इस कदर कि कोई ख्वाब इनमें पल ना सके | 

                               (२)

                           

 लड़कपन की उडान भरती बच्चियों !!

बहककर उलझ ना किसी ऐसे जाल में जो तुम्हारे जीवन का जंजाल बन ज़ाये |फूंक फूंक कर रखना हर कदम स्वार्थ की इस दुनियां में |पड ना जाना किसी ऐसे अमीर के प्यार में जो बेच दे अपना ज़मीर और फिर एक दिन सौदा कर दे तुम्हारे सपनों का |झूठे अाश्वासनों के हवाले कर ना देना खुद को |भ्रमित ना हो जाना दुनियां की चकाचौंद में |

                             ( ३)

दुनियां की विवाहित महिलाओं !!!

ज़िम्मेदारियों के बोझ में इतना मत झुकना की तुम्हारी कमर टूट ज़ाये | ससुराल के ताने उतना ही सहना जितने में तुम्हारे स्वाभिमान को आँच ना आये |काम वाली बाई य़ा बंधुआ मजदूर मत बन जाना | जब सहनशक्ति जवाब दे ज़ाये तब देर मत लगाना दुर्गा और काली बनने में |

 बाकी बाते अगले पत्र में ..........

#अनिता पाल

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