बेटियां

 "बेटियाँ"

खरपतवार सी होती हैं बेटियाँ ,

जहां तहां  यहां वहाँ उग आती हैं 

खाद पानी बेटों में और लहराती हैं बेटियाँ|

ज्यों ही ज़माती हैं ज़ड़े 

उखाड दूसरी जगह रोप दी जाती हैं बेटियाँ

नयी मिट्टी में अनुकुलन कर ,

एक बार फिर ज़ड़े मजबूत कर लेती हैं बेटियाँ ||

सबके मन को शीतलता 

और प्यार की छाया देती हैं बेटियाँ |

उम्र बढने के साथ ही देखभाल के अभाव में 

सूख जाती हैं बेटियाँ

और अंततःकाल के झोके से 

भरभराकर गिर जाती हैं बेटियाँ

#अनिता पाल

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