कितना संभालू खुद को
कितना रक्खूं हौंसला ,
कितने करीब आऊँ
कितना रक्खूं फासला |

वक्त बेवक्त ये नैंन बरसते है
तुमसे मिलने को हरपल तरसते है ,
तडपती हूँ तुम्हारी याद में इस कदर
जल बिन जैसे तडपती मीन है
कैसे बताऊँ बिन तुम्हारे
मेरी ज़िंदगी का क्या सीन है ||

करके प्यार बे-इंताह
छोड दिया मुझे तन्हा
याद जब तुम्हारी आती है
ना जीती हूँ ,ना मरती हूँ
नयनों से निकले अश्कों को
होठों से पीती हूँ
बिन तुम्हारे ,
तुम्हारी यादों के सहारे जीती हूँ ||
#AP

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