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ये औरतें होती है साहब
रो लेती है अकेले में
पी लेती है आंसू
उफनती है दूध सी
खिलती हैं धूप सी
सूखती है दूब सी

ये औरतें होती है साहब
बहती है नदियाँ सी
उलझती है लडियां सी
खिलती है फुलझडियां सी

ये औरतें होती है साहब
मुरझाती है फूल सी
उड़ती है धूल सी
चुभती है शूल सी

ये औरतें होती हैं साहब
रहती है हमेशा आधी
हिस्से में आये बर्बादी
कही जाती है आधी आबादी

ये औरतें होती है साहब
होती है चंद्रमुखी
बन जाती है ज्वालामुखी
कभी रहती हैं सुखी
कभी होती है दुखी

ये औरतें होती है साहब
होती है राख सी
दहकती है आग सी
उड़ती हैं फाग सी

ये औरतें होती है साहब
दुलारती हैं माँ सी
फुफकारती है नाग सी
जोड़ती है देवी सी
तोड़ती है शत्रु सी
ये औरतें होती है साहब ||
#AP

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