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"प्रेमपत्र 6"


"प्रियवर "
             सुना है आज कोई खास दिन है | सच कहूँ तो मेरा प्यार किसी एक दिन का मोहताज नहीं | हर रोज की तरह ऑफिस जा रही पर आज की सुबह रोज की सुबह से अलग है बारिश ने सुबह को खुशनुमा बना दिया | कैब में चल रहा गाना " आये हो मेरी ज़िंदगी में तुम बहार बनके ,मेरे दिल में यूँ ही रहना ..,.." ज़ेहन में धीरे धीरे उतर रहा है |

 दिल चाहता है तुम जब भी आओ सावन की तरह आना प्रेमवर्षा से मुझे नखशिख भीगो देना | सच कहूँ तो मुझे बारिश में भीगने का इतना शौक है कि कभी छाता लेकर नहीं चलती और आज घर से निकलते हुए  बारिश की मोटी मोटी बुंदे मन को शीतल कर गयी ..अभी पिछले सप्ताह की ही तो बात है जब ऑफिस से घर जाते समय बारिश में भीगकर ऐसे खुश थी जैसे सावन की बारिश में भीगकर लोग फूले नहीं समाते •| मैं इस बात से भी बेफिक्र थी कि सर्दी की बारिश भीगोकर बुखार को भी आमंत्रित कर सकती है | पर डियर तुम सावन बनके  मोहब्बत बरसा  देना इश्क का बुखार भी हो जाये  मुझे इसकी परवाह नहीं |बाकि बाते बाद में | अपना ख्याल  रखना |
                                   "तुम्हारी प्रियतमा "
                                       नीलम

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