देकर  जन्म  मुझे , किया  मुझ पर उपकार ,
नाजों से  पाला  पोसा और दिये  अच्छे  संस्कार।
पढाया लिखाया और बनाया इतना होनहार ,
जब आयी  मेरी बारी , खुद किया इस जहाँ  से प्रस्थान। .
 विधि के विधाता का कैसा है ये विधान।

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