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"बचपन "
जवानी की दहलीज पर
दे जाता हैं दस्तक बचपन
जब घर के कोने कोने से निकलकर
सज ज़ाते हैं खिलौने पलंग के नीचे ,
बनता हैं खाना बिना चुल्हे
,बिना आटा और बिना दाल के
माँ -बाप ,दादा-दादी समेत सभी रिश्तों
की भूमिकायें निभायी जाती हैं
तोतली जुबां से ||
अतीत को कुरेदते हुए
दो पल के लिये झांक लेती हूँ अपने बचपन में
तुलना करती हूँ आज के बचपन की
अपने बचपन से ...
कोई किसी भी हालात में पला बढा हो
पर बचपन सबको याद आता हैं ||
#अनितापाल
"बचपन "
जवानी की दहलीज पर
दे जाता हैं दस्तक बचपन
जब घर के कोने कोने से निकलकर
सज ज़ाते हैं खिलौने पलंग के नीचे ,
बनता हैं खाना बिना चुल्हे
,बिना आटा और बिना दाल के
माँ -बाप ,दादा-दादी समेत सभी रिश्तों
की भूमिकायें निभायी जाती हैं
तोतली जुबां से ||
अतीत को कुरेदते हुए
दो पल के लिये झांक लेती हूँ अपने बचपन में
तुलना करती हूँ आज के बचपन की
अपने बचपन से ...
कोई किसी भी हालात में पला बढा हो
पर बचपन सबको याद आता हैं ||
#अनितापाल
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