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एे मेरे मन
कितने करूँ जतन
ढूँढ़ती हूँ तुझे यहाँ
मिलता है तू वहाँ
कभी बादल सा आवारा
कभी दुखों का मारा
कभी खुशियों का ज़रिया
कभी आँसू का दरिया ||

एे मेरे मन
कितने करूँ जतन
कभी भरता है उडान
कभी बन जाता नादान
एे मन क्यूँ डोलता है इधर उधर
कभी हो जाता है खुद से ही बेखबर
कभी तो संग मेरे बैठकर
ऐ मन तू मुझसे बात कर
 तू ही मेरी मंजिल
तू ही मेरा हमसफर |
एे मेरे मन ....

#अनितापाल

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