५६३
"हलचल "
गर्भ में बेटी माँ से बात किया करती थी
माँ भी बेटी के दिल की हर धडकन को सुना करती थी |
बेटी जब पूछती "माँ धरती तो बहुत सुंदर होगी ??"
माँ जवाब देती हाँ बेटी धरती तो बहुत सुंदर है
परंतु धरती के लोग .........?(कहकर माँ थोड़ा रूक सी जाती )
हाँ बेटी यहां नदियां है ,पहाड है ,खेत खलिहान है
यहाँ तो बिल्कुल ही एक नया जहान है ||
कुल मिलाकर धरती पर बहुत हलचल है |
पैदा हुई जब बेटी तो चारो तरफ सन्नाटा था
देखकर शांति चारो ओर बेटी के मन में प्रश्न उठा था |
माँ आप तो कहती थी धरती पर बहुत हलचल है
माँ ने कहा हाँ बेटी ,
अभी तो ये तुम्हारा पहला ही पल है |
धीरे धीरे बेटी बडी होती गयी
सखियो संग गुड्डे गुडियां के खेल में खो गयी |
एक दिन धूल से सने हुए माँ की गोद में आयी
बोली माँ ये धरा तो उससे भी सुंदर है ,
ज़ितनी आपने थी बतायी ||
दबी जुबां से माँ ने बेटी की हाँ में हाँ मिलायी
जैसे जैसे बेटी बडी होती गयी ,माँ ने
इस दुनियां की हकीकत उसे समझायी |
इस धरा पर नारी का नहीं है सम्मान
अपमान के घूंट वह पीती है दिन रात |
क्योंकि यह है पुरूष प्रधान समाज
नारी की आवाज को यहाँ दबाया जाता है
हर पल उसे यहाँ सताया जाता है |
न करना कोशिश कभी भैया के बराबर हक पाने की
बेटी का हमेशा चुप रहना ही रीत है इस ज़माने की |
बात करोगी अगर तुम अगर अपनी पढाई की
कहेंगे हमें ज़रूरत नहीं है तुम्हारी कमाई की |
शादी में ढेर सारा दहेज ले जाना पडेगा
सास ससुर के तानो को भी सहना पडेगा
पल पल तुम्हे घुट घुट कर जीना पडेगा ||
बेटी ने कहा .......
माँ इस धरती पर तो बहुत हलचल है
मुश्किल जीना यहाँ एक पल है ||
#अनितापाल
"हलचल "
गर्भ में बेटी माँ से बात किया करती थी
माँ भी बेटी के दिल की हर धडकन को सुना करती थी |
बेटी जब पूछती "माँ धरती तो बहुत सुंदर होगी ??"
माँ जवाब देती हाँ बेटी धरती तो बहुत सुंदर है
परंतु धरती के लोग .........?(कहकर माँ थोड़ा रूक सी जाती )
हाँ बेटी यहां नदियां है ,पहाड है ,खेत खलिहान है
यहाँ तो बिल्कुल ही एक नया जहान है ||
कुल मिलाकर धरती पर बहुत हलचल है |
पैदा हुई जब बेटी तो चारो तरफ सन्नाटा था
देखकर शांति चारो ओर बेटी के मन में प्रश्न उठा था |
माँ आप तो कहती थी धरती पर बहुत हलचल है
माँ ने कहा हाँ बेटी ,
अभी तो ये तुम्हारा पहला ही पल है |
धीरे धीरे बेटी बडी होती गयी
सखियो संग गुड्डे गुडियां के खेल में खो गयी |
एक दिन धूल से सने हुए माँ की गोद में आयी
बोली माँ ये धरा तो उससे भी सुंदर है ,
ज़ितनी आपने थी बतायी ||
दबी जुबां से माँ ने बेटी की हाँ में हाँ मिलायी
जैसे जैसे बेटी बडी होती गयी ,माँ ने
इस दुनियां की हकीकत उसे समझायी |
इस धरा पर नारी का नहीं है सम्मान
अपमान के घूंट वह पीती है दिन रात |
क्योंकि यह है पुरूष प्रधान समाज
नारी की आवाज को यहाँ दबाया जाता है
हर पल उसे यहाँ सताया जाता है |
न करना कोशिश कभी भैया के बराबर हक पाने की
बेटी का हमेशा चुप रहना ही रीत है इस ज़माने की |
बात करोगी अगर तुम अगर अपनी पढाई की
कहेंगे हमें ज़रूरत नहीं है तुम्हारी कमाई की |
शादी में ढेर सारा दहेज ले जाना पडेगा
सास ससुर के तानो को भी सहना पडेगा
पल पल तुम्हे घुट घुट कर जीना पडेगा ||
बेटी ने कहा .......
माँ इस धरती पर तो बहुत हलचल है
मुश्किल जीना यहाँ एक पल है ||
#अनितापाल
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