अक्सर एक स्त्री और पुरूष के सहज आकर्षण को प्रेम का नाम दे दिया जाता है जबकि प्रेम की परिभाषा बहुत विस्तृत ,व्यापक और असीमित है | प्रेम अनंत है ,सुक्ष्म है और सर्वयापी है |
प्यार इंसान को इंसान से ही हो ये भी ज़रूरी नहीं | प्यार जानवरो से भी हो सकता है ,प्यार उन पेड पौधो से भी हो सकता है ज़िन्हे आप हर रोज सींचते है भले ही आप उनकी शीतल छाया में विश्राम ना करते हो या उनके फल ना खाते हो| प्यार घर की उन दीवारो से भी हो सकता है जो आपको अपनेपन का अहसास कराती है | प्यार उन सड़को से भी हो सकता है ज़िनसे होकर आप हर रोज गुजरते है | उन रास्तो में भी बहुत अपनापन होता है ज़िनसे होकर हम पैदल खुद से ही बाते करते हुए हर रोज आते जाते है | एकांत में कुछ पल बीता लेने से खुद से भी प्यार हो सकता है | इसीलिये प्रेम की परिभाषा और अर्थ को संकुचित ना करके अपने दिल और दिमाग को प्रेम की तरह विस्तृत करने की कोशिश की जाये |
(अगर आपको ये पोस्ट समझ ना आये तो मुझे आपकी नासमझी पर प्यार आ सकता है क्योकि प्यार ,सुक्ष्म है और सर्वयापी है |
#अनितापाल
प्यार इंसान को इंसान से ही हो ये भी ज़रूरी नहीं | प्यार जानवरो से भी हो सकता है ,प्यार उन पेड पौधो से भी हो सकता है ज़िन्हे आप हर रोज सींचते है भले ही आप उनकी शीतल छाया में विश्राम ना करते हो या उनके फल ना खाते हो| प्यार घर की उन दीवारो से भी हो सकता है जो आपको अपनेपन का अहसास कराती है | प्यार उन सड़को से भी हो सकता है ज़िनसे होकर आप हर रोज गुजरते है | उन रास्तो में भी बहुत अपनापन होता है ज़िनसे होकर हम पैदल खुद से ही बाते करते हुए हर रोज आते जाते है | एकांत में कुछ पल बीता लेने से खुद से भी प्यार हो सकता है | इसीलिये प्रेम की परिभाषा और अर्थ को संकुचित ना करके अपने दिल और दिमाग को प्रेम की तरह विस्तृत करने की कोशिश की जाये |
(अगर आपको ये पोस्ट समझ ना आये तो मुझे आपकी नासमझी पर प्यार आ सकता है क्योकि प्यार ,सुक्ष्म है और सर्वयापी है |
#अनितापाल
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें