"क्या लिखूँ "
facebook पर what's on your mind लिखा देखकर कभी कभी तो बिना सोचे  ही लिखने को मिल जाता हैं ,कभी कभी सोचते हैं ' क्या क्या लिखे 'और कभी तो सोचती  हूँ 'क्या लिखूँ '!
क्या लिखूँ
बचपन की यादें  या आज के इरादे ,
जीवन का संघर्ष  या सफलता का उत्कर्ष !
मुश्किलों का बुढापा  या जवानी में मस्त  आपा,
महकती भोर या दुख की दुपहरी ,
अंधियारी रात या सुबह सुनहरी !
चमकते दिन या काली रातें ,
कटु वचन या मधुर बातें !
आपनों का साथ या बिगडी हुई बात ,
वो मधुर मिलन या दुखद विदाई !
अपनों  की वफा या गैरों की बेवफाई ,
तारीफों के पुल या जग की हँसाई !
वो दुखता हुआ दिल या पास आती मंजिल ,
अपनों की चाहतें या जीवन की सौगाते !!!
"'क्या लिखूँ "
'अनिता

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