ज़मीन से जुडी हूँ ,इंसानो की कद्र जानती हूँ
अच्छे -बुरे को भलीभांति पहचानती हूँ |
यूँ तो भोली सी सुरत है मेरी
पर गलत को सबक सीखाना भी जानती हूँ |
ज़िन्दगी में सहे है बहुत रंजोगम
पर मुशकिलों को पार करना भी जानती हूँ |
आँखो में झिलमिलाते ख्वाबों को
हकीकत में बदलना जानती हूँ ||
अच्छी हूँ बस अच्छों के लिए
बुरों को उनकी औकात दिखाना जानती हूँ |
यूँ तो रहती है नजरों  में हया ,
पर वक्त आने पर आंखे दिखाना जानती हूँ ||
मुस्कराती हूँ हर गम को छुपाकर
इस ज़िन्दगी की कीमत पहचानती हूँ ||

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