FB-103
"दो मिनट "
मेरे घर के बगल में एक अपार्टमेंट बन रहा हैं जिसमे लगभग एक साल से काम चल रहा हैं उसमे काम करने वाले मजदूर मेरे घर के ठीक पीछे छोटी गली में एक अस्थायी तम्बू बनाकर रह रहे| चुकि अब अपार्टमेंट का बाहरी ढ़ांचा बन चुका हैं इसीलिये उन्होने रहने का प्रबंध अन्दर कर लिया लेकिन उनका चूल्हा अभी भी हमारे घर के पिछले दरवाजे के ठीक सामने हैं ( हम उसे कभी खोलते नहीं )| जब भी उनके यहां खाना बनता हैं तो खाने बहुत अच्छी सी महक हवा में तैर जाती हैं और इसी महक के साथ मुझे याद आता हैं "Engel's Law ", जिसमे प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एें ग ल कहते हैं कि " एक परिवार की आय बढने पर उसका खाने पीने की वस्तुओं पर खर्च का प्रतिशत कम हो जाता है "| चुकि अभी इस परिवार की आय कम है इसीलिये यह अपनी आय का अधिक प्रतिशत खाने पर खर्च करता है | एक और बात क्योकि यह शारीरिक श्रम करता है दिन भर बोझ ढ़ोता है तो अच्छा खाना ज़रूरी हो जाता है | दूध ब्रेड खाकर इसका काम चल ही नहीं सकता |
आज सुबह सवेरे मैं छत पर टहल रही थी | उसी पिछली गली में चूल्हा जल रहा था पति पत्नी दोनो चुल्हे के सामने बैठे थे पति बरतन में पक रहे चावल को बार बार जाँच रहा था वही बगल में बैठी पत्नी छोटा सा दर्पण हाथ में ले मेक अप कर रही थी | शायद उसे कही जाना होगा कामकाजी कपल केवल मध्यमवर्गीय या उच्च वर्गीय परिवारो में ही नहीं पाये जाते बल्कि निम्न वर्गीय परिवारो में भी होते है | पति दिनभर मजदूरी करते ,रिक्क्षा या ओटो चलाते है तो महिलाए भी घरो में काम कर अपना आर्थिक योगदान देती है |
छोटी सी पॉलीथिन से एक डिब्बी से क्रीम निकाल चेहरे पर लगा ,लाल सुर्ख होठ कर ,मांग को सिन्दूर से लथपथ कर पत्नी दो मिनट में तैयार हो गयी लेकिन पति अभी तक चमचे में चावल निकाल हाथ से तोड कर जाँच रहा था कि चावल पके कि नहीं | मैं सोच रही थी कि अगर ये कपल निम्न वर्ग से ना होकर उच्च या मध्यम वर्ग से होता तो नजारा कुछ ऐसा होता पति मैगी या कोई और नूडलस बना रहा होता और पत्नी तैयार हो रही होती नूडलस दो मिनट में बनकर तैयार हो गये होते और पत्नी के जल्दी तैयार होने के आसार कम होते |
मध्यम या उच्च वर्गीय परिवारो में पत्नी के मेकअप का समय पति की आय पर निर्भर करता है ज़ितना ज्यादा आय उतना ज्यादा समय और कभी कभी तो
समय पार्लर में कई कई घंटो तक पहुँच जाता है |
# Anita Pal Sukhatri
"दो मिनट "
मेरे घर के बगल में एक अपार्टमेंट बन रहा हैं जिसमे लगभग एक साल से काम चल रहा हैं उसमे काम करने वाले मजदूर मेरे घर के ठीक पीछे छोटी गली में एक अस्थायी तम्बू बनाकर रह रहे| चुकि अब अपार्टमेंट का बाहरी ढ़ांचा बन चुका हैं इसीलिये उन्होने रहने का प्रबंध अन्दर कर लिया लेकिन उनका चूल्हा अभी भी हमारे घर के पिछले दरवाजे के ठीक सामने हैं ( हम उसे कभी खोलते नहीं )| जब भी उनके यहां खाना बनता हैं तो खाने बहुत अच्छी सी महक हवा में तैर जाती हैं और इसी महक के साथ मुझे याद आता हैं "Engel's Law ", जिसमे प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एें ग ल कहते हैं कि " एक परिवार की आय बढने पर उसका खाने पीने की वस्तुओं पर खर्च का प्रतिशत कम हो जाता है "| चुकि अभी इस परिवार की आय कम है इसीलिये यह अपनी आय का अधिक प्रतिशत खाने पर खर्च करता है | एक और बात क्योकि यह शारीरिक श्रम करता है दिन भर बोझ ढ़ोता है तो अच्छा खाना ज़रूरी हो जाता है | दूध ब्रेड खाकर इसका काम चल ही नहीं सकता |
आज सुबह सवेरे मैं छत पर टहल रही थी | उसी पिछली गली में चूल्हा जल रहा था पति पत्नी दोनो चुल्हे के सामने बैठे थे पति बरतन में पक रहे चावल को बार बार जाँच रहा था वही बगल में बैठी पत्नी छोटा सा दर्पण हाथ में ले मेक अप कर रही थी | शायद उसे कही जाना होगा कामकाजी कपल केवल मध्यमवर्गीय या उच्च वर्गीय परिवारो में ही नहीं पाये जाते बल्कि निम्न वर्गीय परिवारो में भी होते है | पति दिनभर मजदूरी करते ,रिक्क्षा या ओटो चलाते है तो महिलाए भी घरो में काम कर अपना आर्थिक योगदान देती है |
छोटी सी पॉलीथिन से एक डिब्बी से क्रीम निकाल चेहरे पर लगा ,लाल सुर्ख होठ कर ,मांग को सिन्दूर से लथपथ कर पत्नी दो मिनट में तैयार हो गयी लेकिन पति अभी तक चमचे में चावल निकाल हाथ से तोड कर जाँच रहा था कि चावल पके कि नहीं | मैं सोच रही थी कि अगर ये कपल निम्न वर्ग से ना होकर उच्च या मध्यम वर्ग से होता तो नजारा कुछ ऐसा होता पति मैगी या कोई और नूडलस बना रहा होता और पत्नी तैयार हो रही होती नूडलस दो मिनट में बनकर तैयार हो गये होते और पत्नी के जल्दी तैयार होने के आसार कम होते |
मध्यम या उच्च वर्गीय परिवारो में पत्नी के मेकअप का समय पति की आय पर निर्भर करता है ज़ितना ज्यादा आय उतना ज्यादा समय और कभी कभी तो
समय पार्लर में कई कई घंटो तक पहुँच जाता है |
# Anita Pal Sukhatri
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