४०८
मुझे अपने हिस्से की ज़मीं ,
अपने हिस्से का आसमां चाहिये ||
निकल पडी हूँ अकेले ही मंजिल के सफर पर
नहीं मुझे जहां का कारवां चाहिये ||
थक जाऊँ जब मंजिल की राहों में
मन के इरादे जवां चाहिये ||
हो जाऊँ तन्हा जब किसी मोड पर ,
साथ मुट्ठी भर अरमां चाहिये ||
~~~अनिता पाल ~~~
#anitapal
मुझे अपने हिस्से की ज़मीं ,
अपने हिस्से का आसमां चाहिये ||
निकल पडी हूँ अकेले ही मंजिल के सफर पर
नहीं मुझे जहां का कारवां चाहिये ||
थक जाऊँ जब मंजिल की राहों में
मन के इरादे जवां चाहिये ||
हो जाऊँ तन्हा जब किसी मोड पर ,
साथ मुट्ठी भर अरमां चाहिये ||
~~~अनिता पाल ~~~
#anitapal
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