FB-77
होली विशेष ......
मैं होली नहीं खेलूँगी ,
देखूँ कौन मुझे रंग लगाता है |
रूठी हूँ आज होली पर ,
देखूँ कौन मनाने आता है |
बिकते बाजारों के रंगो में रंगना ,
मुझे बिलकुल नहीं भाता है |
ले अाओं वो ही रंग ,
जो बाजारों में नहीं बिकता है |
प्रेम रंग की भरो पिचकारी ,
उसमे रंग दो दुनियाँ सारी |
ये प्रेम रंग ही मुझे भाता है |
ना जाति ,ना धर्म ,ना रंग भेद
ना किसी को हो कोई खेद |
ना हो किसी को कोई मलाल
चहुँ ओर उडे खुशियों का गुलाल |
ऐसी हो बस अपनी होली ,
सब भर ले खुशियों से झोली |
~~~~~अनिता पाल ~~~
#anitapal Anita Pal Sukhatri
होली विशेष ......
मैं होली नहीं खेलूँगी ,
देखूँ कौन मुझे रंग लगाता है |
रूठी हूँ आज होली पर ,
देखूँ कौन मनाने आता है |
बिकते बाजारों के रंगो में रंगना ,
मुझे बिलकुल नहीं भाता है |
ले अाओं वो ही रंग ,
जो बाजारों में नहीं बिकता है |
प्रेम रंग की भरो पिचकारी ,
उसमे रंग दो दुनियाँ सारी |
ये प्रेम रंग ही मुझे भाता है |
ना जाति ,ना धर्म ,ना रंग भेद
ना किसी को हो कोई खेद |
ना हो किसी को कोई मलाल
चहुँ ओर उडे खुशियों का गुलाल |
ऐसी हो बस अपनी होली ,
सब भर ले खुशियों से झोली |
~~~~~अनिता पाल ~~~
#anitapal Anita Pal Sukhatri
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