FB-74
थैंक यू और सॉरी
इस चित्र को पढने के बाद दो घटनायें याद आयी .....
(1) एक दिन मैने अपने घर के एक छोटे बच्चे से कहा बेटा मुझे पेंसिल देना जरा | मैं जानती थी कि इसका पेंसिल बॉक्स हमेशा ही खचाखच रहता है जिसमें पेन की तरह दिखने वाली पेंसिल भी शामिल इसीलिये मैने आलस के कारण इधर उधर तलाश ना करके छोटे बच्चे का ही सहारा लिया | थोडी देर बाद वो एक ऊँगली ज़ितनी लम्बी पेंसिल मेरे हाथ में थमा गया .....इससे छोटी पेंसिल नहीं थी क्या ???? मैने झुंझलाते हुए कहा .....
एक वर्ड होता है "थैंक यू " उसको तो कभी यूज नहीं कर सकती आप..बच्चे ने भी मुझ पर बिगडते हुए कहा | उसके ये शब्द सुन मुझे हंसी आ गयी ......अच्छा एक काम करो अपना पेंसिल बोक्स लेकर अाओं ...जो पेंसिल मुझे अच्छी लगेगी में ले लूँगी और काम के बाद वापस कर दूँगी ....इससे आपके पेंसिल बोक्स में पेंसिल भी कम नहीं होंगी ...बच्चों को अपने भरे हुए पेंसिल बोक्स से जो लगाव होता है उसे मैं बहुत अच्छे से जानती हूँ •| थोडी देर बाद वो बोक्स लेकर आ गया मैने एक पेंसिल ली उसके माथे पर एक चुम्बन ज़ड़ते हुए थैंकस कहा | बच्चा खुश हो गया शायद उसको यही अपेक्षा थी |
(2) एक दिन मैं अपनी सहेली के घर गयी | हम लोग बाते कर रही थी पास में ही एक छोटी बच्ची (लगभग 3 साल की )बेड पर कलाबाजी कर रही थी ,खेलते खेलते अचानक उसका सिर दीवार से जा टकराया |दीवार में सिर लगते ही उसने झट से कहा ...सॉरी | अपने चोट लगे सिर को उसने बाद में सहलाया लेकिन पहले उसके मुंह से सॉरी शब्द निकला ज़िसकी ज़रूरत भी नहीं थी |
सॉरी और थैंक यू जैसे शब्दो का महत्व तभी है जब ये दिल से निकले हो ना कि आदतन इनका प्रयोग किया गया हो | जब इन शब्दो का प्रयोग किया जाये तो दिल में अहसास भी होना चाहिये
अगर आप सचमुच किसी से अपेक्षा नहीं रखते इन शब्दो की आप सुख दुख ,हार जीत में समान भाव रखते है तो सचमुच आप महान व्यक्तित्व है |
थैंक यू और सॉरी
इस चित्र को पढने के बाद दो घटनायें याद आयी .....
(1) एक दिन मैने अपने घर के एक छोटे बच्चे से कहा बेटा मुझे पेंसिल देना जरा | मैं जानती थी कि इसका पेंसिल बॉक्स हमेशा ही खचाखच रहता है जिसमें पेन की तरह दिखने वाली पेंसिल भी शामिल इसीलिये मैने आलस के कारण इधर उधर तलाश ना करके छोटे बच्चे का ही सहारा लिया | थोडी देर बाद वो एक ऊँगली ज़ितनी लम्बी पेंसिल मेरे हाथ में थमा गया .....इससे छोटी पेंसिल नहीं थी क्या ???? मैने झुंझलाते हुए कहा .....
एक वर्ड होता है "थैंक यू " उसको तो कभी यूज नहीं कर सकती आप..बच्चे ने भी मुझ पर बिगडते हुए कहा | उसके ये शब्द सुन मुझे हंसी आ गयी ......अच्छा एक काम करो अपना पेंसिल बोक्स लेकर अाओं ...जो पेंसिल मुझे अच्छी लगेगी में ले लूँगी और काम के बाद वापस कर दूँगी ....इससे आपके पेंसिल बोक्स में पेंसिल भी कम नहीं होंगी ...बच्चों को अपने भरे हुए पेंसिल बोक्स से जो लगाव होता है उसे मैं बहुत अच्छे से जानती हूँ •| थोडी देर बाद वो बोक्स लेकर आ गया मैने एक पेंसिल ली उसके माथे पर एक चुम्बन ज़ड़ते हुए थैंकस कहा | बच्चा खुश हो गया शायद उसको यही अपेक्षा थी |
(2) एक दिन मैं अपनी सहेली के घर गयी | हम लोग बाते कर रही थी पास में ही एक छोटी बच्ची (लगभग 3 साल की )बेड पर कलाबाजी कर रही थी ,खेलते खेलते अचानक उसका सिर दीवार से जा टकराया |दीवार में सिर लगते ही उसने झट से कहा ...सॉरी | अपने चोट लगे सिर को उसने बाद में सहलाया लेकिन पहले उसके मुंह से सॉरी शब्द निकला ज़िसकी ज़रूरत भी नहीं थी |
सॉरी और थैंक यू जैसे शब्दो का महत्व तभी है जब ये दिल से निकले हो ना कि आदतन इनका प्रयोग किया गया हो | जब इन शब्दो का प्रयोग किया जाये तो दिल में अहसास भी होना चाहिये
अगर आप सचमुच किसी से अपेक्षा नहीं रखते इन शब्दो की आप सुख दुख ,हार जीत में समान भाव रखते है तो सचमुच आप महान व्यक्तित्व है |
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