FB-73
पानी की कहानी ,
सुनाती थी मेरी नानी |
चुल्हे चक्की से निपट
कई कोस चल कुएँ से पानी भरके लाती थी नानी |
जंगलो में लोग पीते थे बहता पानी ,
ले गिलास पडोस से माँग लाते थे पानी
ऐसा ही कुछ कहती थी मेरी नानी |
नहीं रहे कुएँ नहीं रही डोर
आया है बदलाव चहुं ओर
बदल गया ज़माना बदल गयी ज़िन्दगानी
ऐसा ही कुछ कहती थी नानी |
कैसे बताऊँ नानी ......???
पहुँचा नहीं अभी भी घर घर पानी
बदल गया ज़माना ,
पर खत्म नहीं हुई पानी की परेशानी ||
~~~~`अनिता पाल ~~~~`
Anita Pal Sukhatri
पानी की कहानी ,
सुनाती थी मेरी नानी |
चुल्हे चक्की से निपट
कई कोस चल कुएँ से पानी भरके लाती थी नानी |
जंगलो में लोग पीते थे बहता पानी ,
ले गिलास पडोस से माँग लाते थे पानी
ऐसा ही कुछ कहती थी मेरी नानी |
नहीं रहे कुएँ नहीं रही डोर
आया है बदलाव चहुं ओर
बदल गया ज़माना बदल गयी ज़िन्दगानी
ऐसा ही कुछ कहती थी नानी |
कैसे बताऊँ नानी ......???
पहुँचा नहीं अभी भी घर घर पानी
बदल गया ज़माना ,
पर खत्म नहीं हुई पानी की परेशानी ||
~~~~`अनिता पाल ~~~~`
Anita Pal Sukhatri
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