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अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष ..

यह भी कैसी विडम्बना है ,
लड़की के साथ पैदा होने से पहले ही भेदभाव शुरू हो जाता है |
पहले तो उसको गर्भ में ही मारने की कोशिश की जाती है ,
यदि वह जन्म ले भी लेती है ,तो फिर वही सिलसिला शुरू हो जाता है |
बेटो को तो सब सुविधाये दी जाती है ,
और बेटियों को उनसे वंचित रखा जाता है |
उसको तो हमेशा पराया धन समझा जाता है
इसीलिये उससे इतना भेदभाव होता है |

इसके बावजूद भी वह सब कुछ सहती है
मन से माँ बाप की सेवा करती है |
क्यों भूल जाते है लोग कि वह दो घरों को रोशन करती है
अपने लिये नहीं वह हमेशा अपनों के लिये जीती है |
ज़िन्दगीं भर ज़हर के घूट पीती है ||
यही पर उसकी पीडा समाप्त नहीं होती
शादी के बाद क्या वो मुसीबते नहीं सहती ?
फिर वह दहेज के लिये प्रताडित की जाती है
यदि वह इन सब से बच जाती है
तो बुढ़ापे में सारी कसर निकल जाती है |
बुढ़ापे में में वह बेसहारा हो जाती है
बेटे - बहु पर वह बोझ बन जाती है |
ज़िनको उसने पाला उनके लिये वह परायी हो जाती है
क्या यही नारी है जो जीवन भर सतायी  जाती है ??
~~~~~अनिता पाल ~~~~``
#Anita Pal Sukhatri

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