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"सच बिन्दी का "
आसान नहीं है एक लडकी होना | एक तरफ शरीर की कोमलता दूसरी तरफ असहनीय दर्द को सहजता से सहने की क्षमता |लाख योग्य होने के बाद भी भोग्य की नजर से ज्यादा देखी जाती है |शायद ये ही हकीकत है |दुनियां का शायद ही कोई कोना हो जहां वो खुद को महफूज महसूस करे |
इनबॉक्स से लेकर सड़क तक इरीटेट करने वालो की कमी नहीं है |अभी अभी बस मे बगल में बैठी महिला ने पूछा ....आपकी शादी हो गयी ...!???
क्यूँ ....मैने पूछा ...
आपने बिन्दी लगा रखी है ...इसीलिये पूछा ..मैने उस अजनबी महिला को गौर से देखने के बाद बिन्दी का सच बताना उचित नहीं समझा |और मुस्करा दी ......साथ ही मन ही मन थोड़ा सा इरीटेट हो गयी |बेवजह लोग कितना ऑबज़र्व करते है | ये प्रशन अगर किसी पुरूष का होता तो वो शायद चुप बैठ जाता उत्तर सुनने के बाद .. पर मोहतरमा को संतुष्टी नहीं हुई और उसने मेरे प्रोफेसन से लेकर अंतरजातिय विवाह तक वार्तालाप कर ड़ाला |उसकी बातों से बोर होकर मैने ये लेख लिखना शुरू कर दिय
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