"तलाश जीवन साथी की "
"शादी फिक्स हो रही है पर लड़की /लडका मुझे ज्यादा पसंद नहीं है ||"
जीवन साथी की तलाश कर रहे नौजवानो की ये प्रमुख समस्या है |.इस विषय पर मेरे विचार ....
जूताऔर जीवन साथी अपने साइज का ही होना चाहिये .....अगर इनका साइज बडा हुआ तो आपको घसीटना पडेगा और साइज छोटा हुआ तो आपको दर्द देगा | रही बात खूबसुरती की .....आपके जूते बहुत खूबसुरत है सब उनकी तारीफ करते है ...पर वे ही जूते अन्दर आपके पैरों में घाव कर देते है आप बिल्कुल भी कमफर्टेबल नहीं है उन जूतो के साथ ....तो ऐसे जूते किस काम के .....|
ये ही बात जीवन साथी पर लागू होती है .....हो सकता है किसी का जीवन साथी बहुत खूबसुरत हो और उसको पहली नजर में ही वो पसंद आ गया हो लेकिन अगर उनके विचार और दिल नहीं मिलते तो ये भी हो सकता है उसे उस सुन्दरता से नफरत हो जाये |
ठीक इसका विपरीत भी हो सकता है . . .किसी का जीवन साथी बहुत साधारण सा हो परन्तु हो सकता है कि उनकी आपसी समझ इतनी अच्छी हो कि एक दुसरे की सादगी में उन्हे खूबसूरती नजर आने लगे | कहने का तात्पर्य यह है कि शारीरिक सौंदर्य य़ा भौतिक सुविधा ख़ुशी का श्रोत कभी नहीं हो सकते मन ,विचार और चरित्र की सुन्दरता ज्यादा महत्वपूर्ण है |
इस लेख को लिखते लिखते मुंशी प्रेमचंद की कहानी "स्त्री और पुरूष " के नायक विपिन और नायिका आशा की याद आ गयी |विपिन जैसे न जाने कितने नौजवान बचपन से सपना पाले है खूबसुरत जीवन संगिनी का ......सभी नौजवान इस कहानी को जरूर पढ़े .. .....इस कहानी का अंत बहुत रूचिकर है .....प्रेमचन्द जी आज भी प्रासंगिक है .....मुझे तो इश्क हो गया है उनकी लेखन शैली से |
"शादी फिक्स हो रही है पर लड़की /लडका मुझे ज्यादा पसंद नहीं है ||"
जीवन साथी की तलाश कर रहे नौजवानो की ये प्रमुख समस्या है |.इस विषय पर मेरे विचार ....
जूताऔर जीवन साथी अपने साइज का ही होना चाहिये .....अगर इनका साइज बडा हुआ तो आपको घसीटना पडेगा और साइज छोटा हुआ तो आपको दर्द देगा | रही बात खूबसुरती की .....आपके जूते बहुत खूबसुरत है सब उनकी तारीफ करते है ...पर वे ही जूते अन्दर आपके पैरों में घाव कर देते है आप बिल्कुल भी कमफर्टेबल नहीं है उन जूतो के साथ ....तो ऐसे जूते किस काम के .....|
ये ही बात जीवन साथी पर लागू होती है .....हो सकता है किसी का जीवन साथी बहुत खूबसुरत हो और उसको पहली नजर में ही वो पसंद आ गया हो लेकिन अगर उनके विचार और दिल नहीं मिलते तो ये भी हो सकता है उसे उस सुन्दरता से नफरत हो जाये |
ठीक इसका विपरीत भी हो सकता है . . .किसी का जीवन साथी बहुत साधारण सा हो परन्तु हो सकता है कि उनकी आपसी समझ इतनी अच्छी हो कि एक दुसरे की सादगी में उन्हे खूबसूरती नजर आने लगे | कहने का तात्पर्य यह है कि शारीरिक सौंदर्य य़ा भौतिक सुविधा ख़ुशी का श्रोत कभी नहीं हो सकते मन ,विचार और चरित्र की सुन्दरता ज्यादा महत्वपूर्ण है |
इस लेख को लिखते लिखते मुंशी प्रेमचंद की कहानी "स्त्री और पुरूष " के नायक विपिन और नायिका आशा की याद आ गयी |विपिन जैसे न जाने कितने नौजवान बचपन से सपना पाले है खूबसुरत जीवन संगिनी का ......सभी नौजवान इस कहानी को जरूर पढ़े .. .....इस कहानी का अंत बहुत रूचिकर है .....प्रेमचन्द जी आज भी प्रासंगिक है .....मुझे तो इश्क हो गया है उनकी लेखन शैली से |
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