"मेरा परिचय "

एक पंक्ति में कहूँ  तो अजूबा हूँ
कर लो दुनियां मुट्ठी में ,
हर रोज इस ख्वाहिश के साथ जगती हूँ |
नियम कानूनों को मानती हूँ ,रिश्ते नातों को निभाती हूँ
छीनता है कोई मेरे अधिकार तो दुर्गा और काली बन जाती हूँ |
मेहनत मैं दिल से करती हूँ ,हर वक्त व्यस्त रहती हूँ
अपने काम से है बेहद प्यार |
किताबों में बसते है मेरे प्राण ||
जीतने की ज़िद है ,इरादे है बुलंद
चाहती हूँ आसमां में उडना स्वच्छंद |
लगाये कोई मुझ पर बन्दिशे ,ये नहीं है पसंद
इसीलिये अपनी सीमायें खुद तय करती हूँ |
समाज में फैली बुराईयां मुझे आहत करती है
राहों की मुशकिले मुझ में जोश भरती है |
मुश्किलों में मैं और मजबूत बन जाती हूँ
राह की दुश्वारियों में भी मैं मुस्कुराती हूँ
खुशियों के गीत हर पल गुनगुनाती हूँ ||
~~~~~~~अनिता पाल ~~~~~~
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