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लड़के और लड़की में होने वाले भेदभाव के लिये मै हमेशा ही समाज को दोष दिया करती थी | मुझे लगता था कि हमारे समाज में हम लडकों को खेलने के लिये कार और हवाई जहाज जैसे खिलोने दिये जाते हैं और लड़की से अपेक्षा की जाती हैं कि वो केवल गुड्डे गुडिया तक सीमित रहे ....और यही हमारे समाज में लिंग असमानता का कारण हैं परन्तु मै गलत थी .......
"पुरूष समाज की देन हैं और महिला प्रकृति की " मीड जैसे चिंतक के ये कथन भी मुझे समझ नहीं आते थे ....लेकिन हाथ में झाडू थामे 11 महीने की इस नन्ही सी जान ज़िसे ये भी नहीं पता कि वो लड़की हैं या लडका ........ऐसे नये नये दृश्य रोज रोज देखने के बाद मुझे समझ आ गया हैं कि सचमुच महिला प्रकृति की अनोखी रचना हैं . और वह माँ और दादी कि भूमिका निभाने के लिये बचपन में ही तैयार हो जाती हैं .....और सीख भी बहुत जल्दी लेती हैं ......और मेकअप करने में तो अव्वल ....माँ के माथे पर बिन्दी हो या ना हो पर इनके माथे पर चिपकी ज़रूर मिल जायेगी .....हाहाहा
लड़के और लड़की में होने वाले भेदभाव के लिये मै हमेशा ही समाज को दोष दिया करती थी | मुझे लगता था कि हमारे समाज में हम लडकों को खेलने के लिये कार और हवाई जहाज जैसे खिलोने दिये जाते हैं और लड़की से अपेक्षा की जाती हैं कि वो केवल गुड्डे गुडिया तक सीमित रहे ....और यही हमारे समाज में लिंग असमानता का कारण हैं परन्तु मै गलत थी .......
"पुरूष समाज की देन हैं और महिला प्रकृति की " मीड जैसे चिंतक के ये कथन भी मुझे समझ नहीं आते थे ....लेकिन हाथ में झाडू थामे 11 महीने की इस नन्ही सी जान ज़िसे ये भी नहीं पता कि वो लड़की हैं या लडका ........ऐसे नये नये दृश्य रोज रोज देखने के बाद मुझे समझ आ गया हैं कि सचमुच महिला प्रकृति की अनोखी रचना हैं . और वह माँ और दादी कि भूमिका निभाने के लिये बचपन में ही तैयार हो जाती हैं .....और सीख भी बहुत जल्दी लेती हैं ......और मेकअप करने में तो अव्वल ....माँ के माथे पर बिन्दी हो या ना हो पर इनके माथे पर चिपकी ज़रूर मिल जायेगी .....हाहाहा
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