ज़िन्दगी "
ज़िन्दगी काश तू अफसाना होती ,
हकीकत से हमारा सामना ना होता |
ज़िन्दगी तू होती ऐसी किताब ,
ज़िसका हर पन्ना कोरा होता |
लिख लेते तकदीर मनचाही
गर ज़िन्दगी पर वश अपना होता ||

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