रच लेती हूँ कविताएं और रह लेती हूँ मौन
खुद से ही पूछ लेती हूँ ,मैं हूँ कौन||
ज़मीं -आसमां ,चाँद तारों से कर लेती हूँ बातें
हर रोज खुद से ही होती है मुलाकाते ||
सुबह -शाम ,दिन-रात और हर रोज
करती रहती हूँ बस अपनी खोज ||
पता नहीं क्यूँ अजीब सी हूँ मैं
बस इतना जानती हूँ खुशनसीब सी हूँ मैं |
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