कभी कभी आँसू जाते हैं हार
कभी हार जाता हैं प्यार |
हार जाती हैं यादे
हार जाती हैं फरियादे |
हार के इस सिलसिले में
एक दिन ज़िंदगी भी जाती है हार ||
और क्या लिखूँ मेरे यार |||
~~~~~~अनितापाल ~~~
दया धर्म की मूरत थी वह ,दुखियों की भगवान थी पिता माणकोजी शिन्दें ,माता सुशीला की गोद में खेली थी ! पाँच भाईयों की वह बहन अलबेली थी !! श्वसुर मल्हार राव होलकर की वह सेविका थी , खण्डेराव होलकर की वह पतिव्रता नारी थी !! मालेराव और मुक्ताबाई की वह ममतामयी माता थी , थे हजारों रूप उसके ,वह जन जन को भायी थी पतित पावन वह पूजनीय अहिल्याबाई थी !! हुई अवतरित जब धरा पर ,सारा कुटुम्ब मुस्काया था उसके अलौकिक तेज से भानू भी शर्माया था !! थी नहीं साधारण नारी ,वह देवी का अवतार थी , दरिद्र जनों के दुख दूर करती ,दुर्गा के समान थी शिवलिंग की पूजा करती सती के समान थी !! विद्वानों को तो वह साक्षात सरस्वती लगती थी मंत्रियों में वह स्वयं मंत्र बन जाती थी , शत्रुओं के समक्ष वह काली का रूप धर लेती थी !! देखकर दुखी जनों को ,वह माँ संतोषी बन जाती थी , सीता समान चरित्रवान और पतिव्रता नारी थी और क्या क्या कहुं उसे ,वह अदभुत चिंगारी थी!! सप्तपुरी ,चार धाम और बारह ज्योर्तिलिंगो को चमकाया था , भारत भर में उसने मन्दिर ,धर्मशाला और घाटों का निर्माण करवाया था , राम राज्य बना...
ऐ नन्ही सी जान तू बन गई है मेरी पहचान रातों को सोचूं दिन को विचारूँ किस नाम से मैं तुझको पुकारूं ऐ नन्ही सी जान , तू बन गई है मेरी पहचान|| तू ही मेरे अरमां, तू ही मेरा खिलौना तू बन गया है मेरा सपना सलोना ऐ नन्ही सी जान तू बन गई है मेरी पहचान|| तू है मेरी चाहत, तू जन्नत है मेरी तुझसे ही तो ये जिंदगी उन्नत मेरी ऐ नन्ही सी जान तू बन गई है मेरी पहचान|| #अनितापाल
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