बेटी  बेटा  एक समान ,
यह हैं दिखावा झूठी शान ||

आज सुबह सुबह फोन की घंटी बजी |एक सहेली की खनखनाती सी आवाज कान में पडी कहां रहती हो आजकल?? कोई खबर ही नहीं |अरे पूनम तुम !!हाँ यार बहुत दिन से सोच रही थी तुमसे  बात करने की ...,..कहानी बाद में सुनाना पहले ये बता मम्मी पापा कैसे हैं ??? ठीक हैं सब, अभी अभी दीदी  के यहां गये हैं दोनों उनको खाना  पैक करके दिया हैं ....खाना पैक क्यूँ दीदी की ससुराल तो पास में ही हैं ....हाँ हैं तो पास में ही लेकिन हमारे यहां  बेटी के घर का नहीं खाते .......कुछ इस तरह की मान्यतायें कम या ज्यादा रूप में हर समाज में विद्धमान हैं  ......पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक कहावत कुछ  ऐसे हैं ......
बहन घर भाई कुत्ता ,सास घर ज़माई कुत्ता |
सौ कुत्तों का वह सरदार ,जो ससुर रहे ज़माई द्वार ||
इस कहावत से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि किसको कितनी इज्ज़त मिलती हैं .......मेरे एक परम प्रिय अफसर भैया की तरह आप में से भी अगर किसी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में घरजमाई बनने का इरादा कर रखा हैं तो मेरी आपको सलाह की आप इसे त्याग ही दे तो अच्छा हैं .......

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