छोटे से गाँव की छोटी सी गलियों में
खेलते कूदते बुने थे कुछ सपने |
छोटे से दिल में थे बहुत अरमान
कोमल थे पंख और छूना था आसमान ||
चंद हसरतों के साथ चल पडा था कारवां
मालूम नहीं थी मंजिल राहे कब थी आसां ||
मजबूत थे इरादे जीतने की थी चाह
चलते गये हम और मिलती गयी राह ||
बहुत बार आयी मुशकिलों की आंधी
ज़िंदगी ने दिये बहुत सारे गम
हंसके सहे हमने वक्त के हर सितम ||
उसूलों पर आँच हमने आने ना दी
चेहरे से मुस्कान जाने ना दी ||
हरदम चले है हम सीना तान
हमारी पहचान है हमारा स्वाभिमान|
~~~~~~अनिता पाल ~~~~``
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