"पराये होते बेटे "
शादी के बाद बेटियां परायी हो जाती हैं सब जानते हैं | शादी के बाद पराये तो बेटे भी हो ज़ाते हैं इस बात को लोग जानते हैं पर मानते नही |बेटियों को एक दिन पराया हो जाना हैं ये बात उन्हे बचपन से ही बता दी जाती हैं और इसके लिये वे मानसिक रूप से तैयार भी रहती हैं लेकिन शादी के बाद जो मानसिक आघात बेटों पर पड़ता हैं उसके लिये उन्हे कोई पहले से बता कर मानसिक रूप से तैय़ार नही करता हैं |
बेटे की शादी के बाद माता पिताजी समझते हैं अब हमारी ज़िम्मेदारी लगभग पूरी हो गयी इस बात से कोई फर्क नही पड़ता बेटे की उम्र क्या हैं या फिर वो नौकरी करता भी हैं या नही | जो पिता हमेशा ही 100 रूपये की ज़रूरत होने पर 200 देते थे वो अब अपना हाथ पीछे खींचने लगते हैं | जो माँ टकटकी लगाकर बेटे के घर आने का इंतजार करती थी और बेटे ज़रा भी लेट होने पर बैचेन हो ज़ाया करती थी अब निश्चिन्त रहने लगती हैं | भैया के घर आते ही जो बहन पानी का गिलास लेकर तुरंत हाजिर होती थी वो भी बेफिक्र हो जाती हैं | भाभी अब खाना समय से परोसना ज़रूरी नही समझती | बस सबको लगता हैं अब तो फिकर करने वाली आ गयी | लेकिन क्या शादी हो जाने मात्र से किसी को अपनो के प्यार की ज़रूरत नही होती ???? क्या एक व्यक्ति सबके प्यार की पूर्ति कर सकता है ???क्या पत्नी के प्यार के बाद माँ और बहन के प्यार की ज़रूरत नही होती ??? आखिर क्यूँ बेटे अपने ही घर में पराये हो ज़ाते है ????सवाल बहुत है ..........जितनी सहानुभूति बेटियों को चाहिये होती है उतनी ही ज़रूरत बेटों को भी है | कितना घुट घुट कर जीते है बेटे काश वो भी बेटियों की तरह फफककर भड़ास निकाल पाते |
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें