मंजिल की चाह  में मुश्किल राह में,जब हमने कदम बढ़ाये
अपनों ने साथ छोड़ा गैरों ने कांटे बिछाए।
ये तो हमारे इरादें ही थे जो हमें यहाँ तक ले आये,
राह की दुश्वारियों से कब थे हम घबरायें।
हर मुश्किल लम्हें में हम यूँ ही मुस्कराएँ।
ये तो.……………………। A.P

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