"प्रेम पत्र --2"
माई डियर "क्रश " तुम दो साल में एक बार  मत आया करिये |मैं तो  कहती हूँ तुम सावन की तरह हर वर्ष आकर  प्रेमवर्षा से मुझे भीगो दिया करिये और पूरे भादो प्रेमाग्नि में तपा दिया करिये |साल में एक ही बार क्यूँ ???? डियर मैं तो कहती हूँ तुम ईद के चाँद की तरह साल में "दो " बार आकर मुझे हर्षा ज़ाया करो |  माई डियर क्या तुम  "तीनों "ऋतुओं में एक एक बार आकर मुझसे नहीं मिल सकते | मेरा दिल तो कहता हैं कि  पूरा चतुर्मास तुम्हारे संग ही बीते | क्या तुम पूनम के चाँद की तरह महीने में एक बार नहीं आ सकते ?????  मैं तो कहती हूँ तुम संडे की तरह हर सप्ताह आ ज़ाया करिये ||
                      माई डियर क्रश तुमको आने के लिये सोलहवें बसंत का इंतजार करने की कोई ज़रूरत नहीं हैं ,ज़िंदगी के तीसरे दशक में भी तुम्हारे लिये  दरवाजे  वैसे ही खुले हैं |माई डियर क्रश  हो सके तो इस बार स्थायी रूप से ही आना ....बार बार आने जाने में तुम्हे भी तकलीफ होती हैं और हर बार तुम्हारे आने के इंतजार में मुझे भी |
माई डियर क्रश स्टिल वेटिंग फोर यू |😊😊

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