Women in india


लड़कियों को दिये जाने वाले ताने भी अजीब से होते है ...जैसे कि पढ रही हो तो अपने लिये पढ रही हो|या फिर .....जोब कर रही हो तो अपने लिये कर रही हो या करोगी | मुझे समझ नहीं आता कि लड़के पढाई और नौकरी दुसरो के लिये करते है  क्या .....???? एक तरफ तो "बेटी बचाओ और बेटी पढाओ "की मुहिम चलायी जाती है दुसरी तरफ आगे बढ़ रही बेटियों के पंखो को कुतरने की कोशिश की जाती हैं |

 बहुत करीब से देखा और महसुस किया हैं इस भेदभाव को| लेकिन मुझे खुशी होती हैं जब मैं देखती हूँ कि तमाम भेदभाव ,मुशकिलो ,चुनौतियो और अभावों के बाद भी महिलाये अपने सपनों को पूरा करने के लिये प्रयासरत हैं | अपने आस पास स्वाभिमान से ओत प्रोत ,आत्म विश्वास से लबरेज महिलाओ को देखती हूँ तो खुशी होती हैं पर  अफसोस ऐसी महिलाये बहुत कम हैं  जो सही वक्त आने पर स्टीक  जवाब देती हैं |
               अभी हाल ही में महिला  world cup की उपविजेता टीम की कप्तान मिताली राज से एक प्रशन पूछा जाता हैं .  .  आपका पसंदीदा पुरूष क्रिकेटर कौन हैं ????? मिताली का जवाब बहुत शानदार था ......अगर ये ही  प्रशन किसी पुरूष क्रिकेटर से महिला  क्रिकेटर के लिये किया ज़ाये तो?? बात ये नहीं हैं कि सवाल क्यूँ किया गया ???? बात ये हैं कि ये सवाल ऐसे समय क्यूँ किया गया जब उन पर पूरा देश गर्व कर रहा हैं उनकी हार को अपने सिर ले उनको विजेता दिखा रहा |

ये पुरूष प्रधान समाज हमेशा ही महिलाओ को दोयम मानता आया है|सफलता का श्रेय सबको चाहिये पर संघर्ष में साथ कम ही लोग देते हैं| साथ  एक महिला कितना भी पढ ले ,कितना भी बुलंदियों को छू ले पर  वो एक महिला ही रहती हैं हर जगह समझौता करती दिखती हैं | दुनियां की सशक्त महिलाओ में शुमार  पेप्सिको की CEO  इन्द्रा नूई जिस दिन इस पद पर नियुक्त होती हैं तो वह बहुत खुश होती हैं कि घर जाकर ये  समाचार दूँगी तोसबको बहुत खुशी होगी | घर आकर उसकी सारी खुशी धरी रह जाती हैं और उसको कहा जाता हैं कि जाओ जाकर दूध ले आओ|नूई बताती हैं कि घर में  और लोग भी थे जो दूध ला सकते थे | बस इस उदाहरण से मेरी जैसी अदनी सी लडकी को अपनी औकात समझ आ जानी चाहिये |
#अनितापाल 

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