FB-173
"थोड़ा सा मियां मिट्ठू बन लूँ क्या 😊😊"
कांटो पर चल सकती हूँ मैं
बिना पंखो के आसमां को छू सकती हूँ मैं |
मुशकिलों के पर्वत झूका सकती हूँ मैं |`|
गम के सागर से मोती खोज सकती हूँ मैं ,
हर उदास चेहरे पर मुस्कान ला सकती हूँ मैं |
मुस्कराके देखलूँ ज़िसको उसे अपना बना सकती हूँ मैं
बन जाऊँ दोस्त ज़िसकी उसे मंजिल से मिला सकती हूँ मैं
बन जाऊँ हमसफर ज़िसकी ,उसकी हर राह को मंजिल बना सकती हूँ मैं |||
मेरे प्यार मेरे समर्पण को मेरी कमजोरी मत समझना
यूँ तो इस जहां के बिना भी रह सकती हूँ मैं |
जीत सको तो प्यार से जीत लेना मेरा दिल
प्यार में सब कुछ हार सकती हूँ मैं |
कभी कभी भावुक हो जाती हूँ अपनो के लिये
चाहूँ तो पत्थर दिल भी बन सकती हूँ मैं ||
कायर नहीं हूँ ,कमजोर नहीं हूँ ,
इतनी भी कच्ची डोर नहीं हूँ ||
ठान लूँ तो समाज की हर बुराई से लड सकती हूँ मैं |
मेरी इस कलम को तुम साधारण मत समझना
इससे भूत और भविष्य भी लिख सकती हूँ मैं |
~~~~~~~अनिता पाल ~~~~~~
# Anita Pal Sukhatri
"थोड़ा सा मियां मिट्ठू बन लूँ क्या 😊😊"
कांटो पर चल सकती हूँ मैं
बिना पंखो के आसमां को छू सकती हूँ मैं |
मुशकिलों के पर्वत झूका सकती हूँ मैं |`|
गम के सागर से मोती खोज सकती हूँ मैं ,
हर उदास चेहरे पर मुस्कान ला सकती हूँ मैं |
मुस्कराके देखलूँ ज़िसको उसे अपना बना सकती हूँ मैं
बन जाऊँ दोस्त ज़िसकी उसे मंजिल से मिला सकती हूँ मैं
बन जाऊँ हमसफर ज़िसकी ,उसकी हर राह को मंजिल बना सकती हूँ मैं |||
मेरे प्यार मेरे समर्पण को मेरी कमजोरी मत समझना
यूँ तो इस जहां के बिना भी रह सकती हूँ मैं |
जीत सको तो प्यार से जीत लेना मेरा दिल
प्यार में सब कुछ हार सकती हूँ मैं |
कभी कभी भावुक हो जाती हूँ अपनो के लिये
चाहूँ तो पत्थर दिल भी बन सकती हूँ मैं ||
कायर नहीं हूँ ,कमजोर नहीं हूँ ,
इतनी भी कच्ची डोर नहीं हूँ ||
ठान लूँ तो समाज की हर बुराई से लड सकती हूँ मैं |
मेरी इस कलम को तुम साधारण मत समझना
इससे भूत और भविष्य भी लिख सकती हूँ मैं |
~~~~~~~अनिता पाल ~~~~~~
# Anita Pal Sukhatri
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