जब जब भी तपता हैं बुखार से शरीर ,
आँखों में उभर आती हैं माँ की तस्वीर l
दवाई लेकर आगे पीछे डोलती माँ ,
गाँव भर में डॉक्टर को खोजती माँ l
कभी इधर कभी उधर खाँसती सी माँ ,
वैद्ध बन नुस्खे आजमाती सी माँ l
नर्स सी सेवा में तत्पर रहती माँ ,
कभी अन्दर कभी बाहर चूडी खनकाती माँ l
छूट गयी माँ साथ ही छूट गया गाँव ,
गाँव में जाने को अब पड़ते नहीं पाँव l
नगरों की भीड में रह गये हैं अकेले ,
पीछे छूट गये अब गाँव के मेले l
व्यस्त सी ज़िन्दगी अजीब सी भाग दौड ,
समझ नहीं आता किस बात की हैं होड ll
---------+Anita Pal---+)
आँखों में उभर आती हैं माँ की तस्वीर l
दवाई लेकर आगे पीछे डोलती माँ ,
गाँव भर में डॉक्टर को खोजती माँ l
कभी इधर कभी उधर खाँसती सी माँ ,
वैद्ध बन नुस्खे आजमाती सी माँ l
नर्स सी सेवा में तत्पर रहती माँ ,
कभी अन्दर कभी बाहर चूडी खनकाती माँ l
छूट गयी माँ साथ ही छूट गया गाँव ,
गाँव में जाने को अब पड़ते नहीं पाँव l
नगरों की भीड में रह गये हैं अकेले ,
पीछे छूट गये अब गाँव के मेले l
व्यस्त सी ज़िन्दगी अजीब सी भाग दौड ,
समझ नहीं आता किस बात की हैं होड ll
---------+Anita Pal---+)
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