"राह और मंजिल "
मंजिलो की राहे होती है ,
क्या राहो की भी मंजिल होती है ???
अगर होती है ........!!
तो राहें मंजिल तक पहुँचती क्यूँ नहीं ????
अगर नहीं होती तो......!!
राहें चलती क्यूँ है ?????
राह और मंजिल की मिलीभगत मुसाफिर को भ्रमित कर देती है |
कभी हो जाती है मंजिल ओझल
कभी बस राह ही राह नजर आती है ...|
अगर राह को पता है मंजिल की दूरी
ऐसी भी है क्या उसकी मजबूरी |
मुसाफिर को वह बताती क्यूँ नहीं ???
किसी को मंजिल की तलाश है ,
किसी को राहों से आस है |
ज़िंदगी में हर किसी को प्यास है |
कोई थोड़ा खुश है ज़िंदगी में ,
तो कोई बहुत ज्यादा निराश है |
`~~~~~~~~~अनिता पाल ~~~~~
#Anita Pal Sukhatri
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