"चलते -चलते ---2
चलती का नाम गाडी ......या चलना ही ज़िंदगी हैं .....या चलते चलते यूँ हीं ........ना जाने कितने गीत और किस्से इस " चलने " पर लिखे गये हैं | भाग दौड ,अस्त व्यस्त सी इस ज़िंदगी में चार कदम चलकर तो देखिये खुद के साथ | कभी धीरे धीरे टहलते हुए खुद से बाते करके तो देखिये | कृत्रिम सी  हो चुकी ज़िंदगी में  प्रकृति के सौन्दर्य को उतार कर तो देखिये ,कितने आनन्द की अनुभूति होती हैं |कभी महसुस करके तो देखिये सुबह हरी घास पर झूलती बूंदे जब आपके चरण स्पर्श करती हैं तो आपके मन को कितना सकुन मिलता हैं | सुबह  के अंधरे को चीरती हवा का झोंका जब आपको नख से शिख तक स्पर्श करता हैं तो आपका रोम  रोम खिल उठता हैं |आपको लगता हैं आपसे सुखी इंसान इस दुनियां में कोई नहीं |  प्रकृति से निकटता आपके अन्दर की रचनात्मक क्षमता को बाहर लाती हैं |सचमुच प्रकृति के सानिध्य में रहकर अध्यात्म को जितने अच्छे से महसुस किया जा सकता हैं  उतना कारगर और कोई तरीका नहीं हैं | अध्यात्म एक तरीका  खुद को जानने का ,खुद की खोज करने का |इस दुनियां में आकर अगर खुद को ही नहीं जाना तो क्या जाना ????? ज़रा सोचिये|

 सुबह हवाखोरी के बहाने निकल जाईये प्रकृति की संगत का आनन्द लीजिये | रात में चाँद तारों को निहार लीजिये |शर्त लगा लीजिये चाँद तारों से एक दिन में तुमसे भी ऊँचा उठ जाऊँगा /ज़ाऊँगी |कभी कभी ललकार दीजिये आसमां को भी कि देख लेना एक दिन मेरा विस्तार तुझसे  भी ज्यादा होगा | चाँद सितारो से बाते कीजिये अपने ड्रीम प्रोजेक्टस और अपने भविष्य की |तब देखिये आपके अन्दर  ब्रहमांड की असीमित सकारतमक ऊर्जा का संचार होगा | निराशा ,तनाव ,बीमारी सब छू मंत्र हो ज़ायेगी |आपको किसी हमदर्द या सहारे की ज़रूरत नहीं पडेगी |प्रकृति सीख  हैं ,प्रकृति प्रेरणा हैं ,प्रकृति औषधि हैं |,आजमा कर देखिये आप भी | 
~~~~~~~~~अनिता पाल ~~~`~~~
#Anita Pal Sukhatri

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