"ना परवा हैं ,ना पछुआ हैं
चली आज ये कौन  सी हवा हैं !
दुख का बादल हैं ,नैनो का नीर हैं ,
दिल में आज अजीब सी पीर हैं !
सहमी सहमी  सी हैं ये  धरती ,
आसमाँ भी मौन  हैं !!
ज़िन्दगीं की इस नाव का खिवैया कौन हैं !!!!!
*********अनिता  पाल सुखत्रि *********"

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