मेरा बचपन


सावन में तीज का अपना एक अलग ही महत्व है |कल तीज का त्योहार था |सोसाइटी में खूब चहल पहल थी माहौल मेले के जैसा था ...स्टाल लगे थे ....आईसक्रीम ,चोकलेट पर बच्चे टूट रहे थे | एक तरफ बच्चो के लिये प्रतियोगिता थी तो दुसरी तरफ महिला प्रतियोगिता में  खूब उत्साह दिख रहा था |सौन्दर्य प्रतियोगिता में किसके बाल सबसे लम्बे है ,किसके हाथ में सबसे ज्यादा अंगुठिया   है या किसके ईयररिंगश सबसे लम्बे है ....माईक थामे महिला की जोरदार आवाज हवा में गुंज रही थी |   विभिन्न रंगो और डिजाइन वाले परिधानो में सजी धजी महिला एक से बढकर एक थी ,हरे रंग की प्रधानता दिखाई दे रही थी लेकिन मेरी आँखे किसी और को तलाश रही  है थी | मखमली लाल सुर्ख लिबास में लिपटी नाजुक ,सुन्दर और कोमलता से भरी जब वो हरे घास में धीरे धीरे चलती तो बहुत ही खूबसूरत दिखती थी |ज़रा सा उसको छू लो तो सिकुड सी जाती |बहुत ही कोमल होती हरी घास और उसके लाल लिबास की matching  का कोई जवाब नहीं होता था | माँ से उसके बारे में पूछा कि कौन है ये .....माँ ने बताया ये इसका नाम तिज्जो है |

 सावन में तीज के त्योहार के मौसम में बारिश के बाद अक्सर इनका झुंड और कभी कभी अकेले भी दिख जाती थी | जी हां मैं बात कर रही हूँ .....तस्वीर में दिखने वाले न्नहे से कीट की |बचपन में इसके प्रति दिवानगी भी गजब की थी |इसको हाथ में  लेकर मुठ्ठी में बंद करना और इसका बाहर आने का प्रयास करना .....दो प्रतियोगी होने का अहसास कराता कि देखते है कोन जीतता है मुठ्ठी में बंदकरने वाला या बाहर आने वाला | तीज के मौसम में इस नन्हे से जीव की याद आ गयी |
          इस अदभुत जीव के बारे में मलिक  मुहम्मद ज़ायसी से लेकर कई अन्य ने भी लिखा है | इसको बीरबहुटी/राम की डुकरिया /रानी कीडा /rain valvet mites /lady fly /velvet buchi आदि नामों से जाना जाता है लेकिन बचपन में हम इसे तीज्जो ही कहते थे |क्या आपने भी इसको देखा है ?? इसको किस नाम से बुलाया जाता है आपके यहां  ज़रूर बताये ???
इसको लिखते लिखते बचपन की एक और बात याद आ गयी |
एक छोटा सा कीडा होता था एकदम काले रंग का |अक्सर बरसात में दिखता था वो चलता बहुत तेज था |हम उसको राम जी  की भैंस कहते थे | क्यूँकि वो थोड़ा तेज चलता था तो पकडना थोड़ा मुशकिल होता था बच्चों के लिये |बच्चे इसको मुठ्ठी में पकडकर खडे ही होते कि ये बाहर मिलता | राम जी की भैंस होती कि मुठ्ठी में रुकती ही नहीं थी |लेकिन इसको पकड बच्चे चिल्लाते राम जी की भैंस पकड ली |इसको पकड बच्चो की खुशी ऐसी होती मानो अश्वमेघ यज्ञ का घोडा पकड लिया हो| बचपन भी बचपन ही होता है जहां खुशी भी णा  हो वहां भी खुशी तलाश लेते है |😄😃😂
#मेराबचपन
#य़ादोकाidiotbox

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