माँ
*मेरी माँ*
देकर जन्म मुझे किया मुझ पर उपकार
ना जो से पाला पोसा बनाया इतना होनहार
जब आई कुछ करने की मेरी बारी
इस जहां से किया प्रस्थान
विधि के विधाता का
कैसा है यह विधान
सचमुच मां तुम थी बहुत महान||
जब भी मैं गिरी या लड़खड़ाई
उस समय बस याद तेरी आई
मेरी हर मुश्किल राह को किया तुमने आसान
सचमुच मां तुम थी बहुत महान||
ऐसी भी क्या थी मजबूरी जो बना ली मुझसे यूं दूरी
क्यों इतनी जल्दी छोड़ दिया यह जहान
सचमुच मां तुम थी बहुत महान||
निकली हूं मां बनने के सफर पर
सच कहूं मां लगता है बहुत डर
तुम साथ होती तो यह सफर हो जाता आसान
सचमुच मां तुम थी बहुत महान||
यूं तो मुझ पर है बहुत जिम्मेदारी
कभी-कभी होता है सिर बहुत भारी
फिर याद आती है बातें तुम्हारी
कमजोर नहीं है मेरी बेटी
बिटिया तुम तो हो मेरी शान
सचमुच मां तुम थी बहुत महान||
निस्वार्थ प्रेम और ममता की मूरत
मनमोहक सादगी भोली सी सूरत
अपने बच्चों के लिए किया सब कुछ कुरबान
सचमुच मां तुम थी बहुत महान||
आज अगर तुम इस दुनिया में होती
अपनी सुख दुख मैं तुमसे कहती
लगते ग़ले और जी भर के रोती
जिंदगी मेरी होती बहुत आसान
सचमुच मां तुम थी बहुत महान||
यूं तो सपनों में रोज मुलाकात होती है
पर नहीं अब तुमसे ,रुबरु बात होती है
तुम हो मेरी प्रेरणा, तुम हो मेरी जान
सचमुच मां तुम थी बहुत महाऩ
करती हूं मां तुमसे वादा
नहीं होऊंगी मैं उदास ज्यादा
तुम्हारी प्रेरणा और संस्कारों का
आने वाली पीढ़ी भी करेगी गुणगान
सचमुच मां तुम थी बहुत महाऩ||
*अनिता पाल*
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