हलचल

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"हलचल "

गर्भ में बेटी माँ से बात किया करती थी 

माँ भी बेटी के दिल की हर धडकन को सुना करती थी |

बेटी जब पूछती "माँ धरती तो बहुत सुंदर होगी ??"

माँ जवाब देती हाँ बेटी धरती तो बहुत सुंदर है 

परंतु धरती के लोग .........?(कहकर माँ थोड़ा रूक सी जाती )

हाँ बेटी यहां नदियां है ,पहाड है ,खेत खलिहान है 

यहाँ तो बिल्कुल ही एक नया जहान है ||

कुल मिलाकर धरती पर बहुत हलचल है |

पैदा हुई जब बेटी तो चारो तरफ सन्नाटा था 

देखकर शांति चारो ओर बेटी के मन में प्रश्न उठा था |

माँ आप तो कहती थी धरती पर बहुत हलचल है 

माँ ने कहा हाँ  बेटी ,

अभी तो ये तुम्हारा पहला ही पल है |

धीरे धीरे बेटी बडी होती गयी 

सखियो संग गुड्डे गुडियां के खेल में खो गयी |

एक दिन धूल से सने हुए माँ की गोद में आयी 

बोली माँ ये धरा तो उससे भी सुंदर है ,

ज़ितनी आपने थी बतायी ||

दबी जुबां  से माँ ने बेटी की हाँ में हाँ मिलायी 

जैसे जैसे बेटी बडी होती गयी ,माँ ने 

इस दुनियां की हकीकत उसे समझायी |

इस धरा पर नारी का नहीं है सम्मान 

अपमान के घूंट वह पीती है दिन रात |

क्योंकि यह है पुरूष प्रधान समाज 

नारी की आवाज को यहाँ दबाया जाता है 

हर पल उसे यहाँ सताया जाता है |

न करना कोशिश कभी भैया के बराबर हक पाने की 

बेटी का हमेशा चुप रहना ही रीत है इस ज़माने की |

बात करोगी अगर तुम अगर अपनी पढाई की

 कहेंगे हमें ज़रूरत नहीं है तुम्हारी कमाई की |

शादी में ढेर सारा दहेज ले जाना पडेगा 

सास ससुर के तानो को भी सहना पडेगा 

पल पल तुम्हे घुट घुट कर जीना पडेगा ||

बेटी ने कहा .......

माँ इस धरती पर तो बहुत हलचल है 

मुश्किल जीना यहाँ एक पल है ||

#अनितापाल

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