"भारत की महान विभूति "
           
                               आज अचानक ही एक पुरानी डायरी मेरे हाथ में आ गयी और जब मैने उसे खोला और पढा तो एक कविता जो मैने सालों पहले जब मैं 11th class में थी ,तब लिखी थी दिल को छू गयी और उसे आप सब से साझा करने का मन हुआ !आप  भी पढ़िये मुझे पूरा विश्वास हैं आपको भी कुछ ना कुछ प्रेरणा अवश्य मिलेंगी ........

दया धर्म की मूरत थी वह ,दुखियों की भगवान थी
पिता माणकोजी शिन्दें ,माता सुशीला की गोद में खेली थी !
पाँच भाईयों की वह बहन  अलबेली थी !!
श्वसुर मल्हार राव होलकर की वह सेविका थी ,
खण्डेराव होलकर की वह पतिव्रता नारी थी !!
मालेराव और मुक्ताबाई की वह ममतामयी  माता थी ,
थे हजारों रूप उसके ,वह जन जन को भायी थी
पतित पावन  वह पूजनीय अहिल्याबाई  थी !!
हुई अवतरित जब धरा पर ,सारा कुटुम्ब मुस्काया था
उसके अलौकिक तेज से भानू भी शर्माया था !!

थी नहीं साधारण नारी ,वह देवी का अवतार  थी ,
दरिद्र जनों के दुख दूर करती ,दुर्गा के समान थी
शिवलिंग की पूजा करती सती के समान थी !!
विद्वानों को तो वह साक्षात सरस्वती लगती  थी
मंत्रियों में वह स्वयं मंत्र बन जाती थी ,
शत्रुओं के समक्ष वह काली का रूप धर लेती थी !!
देखकर दुखी जनों को ,वह माँ संतोषी बन जाती थी ,
सीता समान चरित्रवान और पतिव्रता नारी थी
और क्या क्या कहुं उसे ,वह अदभुत चिंगारी थी!!

सप्तपुरी ,चार धाम और बारह ज्योर्तिलिंगो  को चमकाया था ,
भारत भर में उसने मन्दिर ,धर्मशाला और घाटों का निर्माण करवाया था ,
राम राज्य बनाया अपना राज्य,जब सब जगह अत्याचार छाया था !!
लिखा नहीं था सुख भाग्य में ,खुद सौभाग्य बनाया था ,
प्रकृति ने भी कदम कदम पर उसको आजमाया था
हुई पति की मौत, यह क्या कम संकट छाया था !!
इतना ही नहीं पुत्र  भी काल के गाल में समाया था
खबर मिली जब पति मरण की ,सती होने का विचार किया
तुम ही मेरा बेटा हो ,तुम ही मेरा सबकुछ हो ,
सुनकर ये वचन  ससुर के ,स्वर्ग जाने का विचार त्याग दिया !!
जग गयी सोयी चेतना ,इस धरती को स्वर्ग बनाने का प्रण लिया ,
मिला नहीं परिवार का सुख कभी ,विपदाओं ने घेर लिया
पति और पुत्र की मौत ,ससुर की  मौत को भी झेल लिया !!
नहीं हुई थी परीक्षा अभी पूरी ,और भी बहुत खेल हुआ
बेटी उसकी सती हो गयी ,नाती नथ्याबा भी जीने में फेल हुआ !!

इन सबको सहने पर उसने ,अपना रूप बदल लिया
बन गयी वह देवी ,जन जन का कल्याण किया
तुलसी दल रख दिया सम्पति पर ,दृढ़ निश्चय कर लिया
गरीबों  ,भूखों ,रोगियों का हैं ये ,खुद न एक भी पैसा  लिया !!
करते हुए भी अकर्ता बन गयी ,सब कुछ भगवान को सौप दिया
28 वर्ष 5 माह 17 दिन उसने एकछत्र राज किया !!

सीख  लो इस देवी से क्या अनोखी नारी थी
मर कर भी अमर हो गयी ,यह उसकी होशियारी थी
चरित्रता और सच्चाई उसकी रग रग में समायी थी
धर रूप अहिल्या का वह  ,हमकों सीख सिखाने आयी थी !!!!
----------अनिता पाल सुखत्रि -----------------

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